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बीजेपी को चुभ गई अखिलेश की चुनौती

By Shakti Prakash Shrivastva on September 4, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                               यूं तो सियासत में नेताओं द्वारा एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाना कोई नई बात नही है। किसी मुद्दे पर कोई नेता अपने दलीय निष्ठा के आधार पर दूसरे को आरोपित करता है तो दूसरा नेता भी अपने दलीय नीति-निर्देशों के तहत उसका काउंटर करते हुए जवाब देता है। आज यह सियासत की सतत प्रक्रिया बन चुकी है। कभी-कभी ऐसा भी होता है खासकर जब अवसर चुनावी हो तो यही आरोप-प्रत्यारोप काफी अहम हो जाते हैं। यहाँ तक की चुनावी नफा-नुकसान की वजह भी बनते हैं। जैसे अभी उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की घोसी विधानसभा के लिए हो रहे उपचुनाव के मौके पर सपा मुखिया अखिलेश यादव द्वारा किये गए ट्वीट को ही देखें। अखिलेश ने केंद्र सरकार द्वारा एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर बनाई गई कमेटी पर पलटवार करते हुए एक ट्वीट किया जिसमे लिखा कि हर बड़े काम से पहले एक प्रयोग किया जाता है। इसी बात के आधार पर हम यह सलाह दे रहे हैं कि एक देश एक चुनाव करवाने से पहले बीजेपी सरकार इस बार लोकसभा के साथ-साथ देश के सबसे अधिक लोकसभा और विधानसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश के लोकसभा-विधानसभा के चुनाव साथ कर कर देख ले। इससे एक तरफ चुनाव आयोग की क्षमता का भी परिणाम सामने आ जाएगा और जनमत का भी। साथ ही बीजेपी को यह भी पता चल जाएगा कि जनता किस तरह बीजेपी के खिलाफ आक्रोशित है और उसको सत्ता से हटाने के लिए कितनी उतावली है। अखिलेश का यह ट्वीट बीजेपी नेताओं को चुभ गई। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जवाब में कहा कि अखिलेश यादव को जितने भी सुझाव देने हैं वो इसके लिए बनी कमेटी के सामने दें। उन्होंने ये भी कहा कि अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं। जब संसद में इस मुद्दे पर चर्चा हो तो डिंपल को वो सुझाव संसद में रखना चाहिए। बल्कि ट्वीट का जिक्र कर कहा कि उसका रिजल्ट अभी उन्हें घोसी से ही मिल जाएगा। जनता किसे लेकर आक्रोशित है और किसके साथ प्रसन्न है। पता चल जाएगा। सूबे के दूसरे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने तो अखिलेश को यहाँ तक कह दिया कि वे 2014 से लेकर 2022 तक 4 चुनाव हार चुके हैं । अखिलेश यादव की जमीन खिसक चुकी है, लेकिन फिर भी न जाने किस बात का उन्हे गुमान है। उन्हें भ्रम में नहीं रहना चाहिए। 2024 में भी प्रचंड बहुमत से बीजेपी आ रही है।

बीजेपी के इन दो वरिष्ठ नेताओं के अलावा NDA गठबंधन के सहयोगी क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने भी अखिलेश को निशाने पर ले रखा है।  सपा का साथ छोड़ने के बाद लगातार अखिलेश यादव पर हमलावर रहने वाले सुभासपा अध्यक्ष ओपी राजभर का कहना है कि अखिलेश यादव के पास अब ट्वीट करने के अलावा कोई काम नहीं बचा है। वह केवल ट्विटर के नेता हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अखिलेश जी को अपनी एक टीम आज घोसी भेज कर चेक करना चाहिए कि यहां जनता किसके साथ है। यहां रैली नहीं बल्कि रैला हो रहा है। पूरे घोसी का जनमानस यहां उमड़ा है। वह भी रैली करके गए थे, लेकिन यहां जो लोग आए हैं वह केवल घोसी के ही हैं। अलग-अलग जिलों के नहीं। उनकी पार्टी वन नेशन वन इलेक्शन का समर्थन करती है। चाहे चुनाव एक साथ हो या फिर अलग-अलग हो 2024 में समाजवादी पार्टी का सफाया होगा। निषाद पार्टी प्रमुख और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद की मुताबिक अखिलेश यादव सपना देख रहे हैं वो देखते रहें जनता अपना काम कर रही है। जनता के हक का 85% खाने वालों को जनता अब गद्दी से हटा रही है। 2004 से 2014 तक सपा बसपा ने कमजोर सरकार केंद्र में बनवाई और कमजोरों का हिस्सा लूट लिया। लेकिन अब जनता समझदार है। इसीलिए लगातार इन्हें सत्ता से खदेड़ रही है। उन्होंने ये भी कहा कि उनकी पार्टी वन नेशन वन इलेक्शन का सपोर्ट करती है। ये देश के विकास के लिए आवश्यक भी है।

अपना दल के प्रांतीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल ने अखिलेश यादव को आगाह करते हुए कहा कि घोसी की जनता उनके ट्वीट का जवाब देगी। प्रदेश की जनता ने 2014, 2017, 2019 और 2022 में मोदी जी के नेतृत्व वाले NDA का साथ देकर ही अखिलेश को जवाब स्वयं दे दिया है। उन्होंने कहा कि 2024 में भी NDA उत्तर प्रदेश में 80 की 80 लोकसभा सीटें जीतेगा। अखिलेश यादव ने जो ट्वीट किया है घोसी उपचुनाव का परिणाम उनके उस ट्वीट का जवाब देगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि घोसी उपचुनाव का परिणाम इन नेताओ के दावों के अनुरूप होता है या अखिलेश के सपने के मुताबिक।

 

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