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August 10, 2026
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आखिरकार महाराष्ट्र में फड़नवीस सरकार !

By Shakti Prakash Shrivastva on June 29, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

मेरा पानी उतरते देखते हुए किनारे घर मत बना लेना मैं समुंदर हूँ वापस लौट कर आऊँगा

ये चंद पंक्तियाँ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेन्द्र फड़नवीस की हैं। जो उन्होंने 2019 में महाराष्ट्र विकास अघाडी की सरकार बनने के वक्त व्यक्त की थीं। कहते हैं परिस्थितियाँ वापस लौटती हैं। तो महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व बीजेपी नेता फड़नवीस के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। 29 जून को देर रात शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की गठबंधन वाली महाराष्ट्र विकास अघाडी सरकार के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा पद से इस्तीफा देने के बाद उपजे हालात से फड़नवीस को पुनः सत्तासीन होने का मौका मिलने जा रहा है। 2019 में एनसीपी के बागी नेता अजित पवार के सहयोग से फड़नवीस के नेतृत्व में बनी सरकार जब महज 2 दिन में ही अजित के ही पाला बदलने से चली गई थी। तभी से अपने अपमान का घूंट पी कर बैठे फड़नवीस सहित बीजेपी का आलाकमान अवसर की तलाश में था कि कुछ ऐसा हो कि पुनः महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बन जाए। लेकिन इस बार बीजेपी बहुत संभल्-संभल कर राजनीतिक चालें चल रही थी। क्योंकि कहा जाता है कि दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है। सो बीजेपी भी कुछ इसी नीति पर चल रही थी। हुआ ये कि एक लंबे अरसे से शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे की कार्यशैली से शिवसेना विधायक असन्तुष्ट चल रहे थे। बीजेपी ने बड़ी सूझ-बूझ के साथ बागी शिवसेना विधायकों को एकनाथ शिंदे की अगुवाई में बगावत करने का माहौल पैदा करने में सहयोग किया। 21 जून को लगभग तीन दर्जन विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे ने गुजरात के सूरत पहुँच पार्टी से बगावत का बिगुल फूँक दिया। सूरत से विधायक आसाम के गुवाहाटी जा पहुंचे। गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल से बागी विधायकों की खबरे मीडिया के जरिए आम होती रही। दूसरे दिन मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्थितियों का आकलन करते हुए मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ छोड़ दिया और देर रात अपने परपरागत आवास ‘मातोश्री’ पहुँच गए। अगले दिन पद से इस्तीफा देने की तैयारी कर रहे उद्धव को अचानक एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने ऐसा करने से रोक दिया। महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार के सुझाव को अहम मान उद्धव ने इस्तीफा नही दिया। उन्हे विश्वास हो गया कि पवार कोई रास्ता बेहतर निकाल सकते है। अभी घटनाक्रम चल ही रहा था कि 28 जून को पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेन्द्र फड़नवीस ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिल कर  विधान सभा पटल पर फ्लोर टेस्ट की मांग कर दी। राज्यपाल ने उद्धव सरकार को 30 जून को दिन में 11 बजे बहुमत सिद्ध करने का निर्देश दे दिया। पवार के सुझाव पर शिवसेना राज्यपाल के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गयी जहां 29 जून की देर रात कोर्ट ने राज्यपाल के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस आदेश के मिलते ही विकल्प के अभाव में उद्धव ठाकरे ने फ़ेसबुक पर लाइव होते हुए अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया। देर रात राज भवन जा औपचारिक लिखित इस्तीफा भी सौंप दिया। इस तरह लगभग 8 दिनों तक चले पॉलिटिकाल वेब सीरीज का क्लाइमेक्स पुनः फड़नवीस को सत्तासीन करने के संभावनाओं के साथ समाप्त हुआ। सत्ता छोड़ने के वक्त कही गई फड़नवीस की बात सच साबित हो रही है। वो वापस सत्ता के शीर्ष पर आसीन होने के करीब है।

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