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योगी शरणम गच्छामि !

By Shakti Prakash Shrivastva on July 29, 2025
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                                                                                         शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
बृजभूषण शरण सिंह देवीपाटन मण्डल की सियासत के एक रसूखदार चेहरा है। उनका मण्डल की और अगल-बगल के लगभग दर्जनों विधानसभा क्षेत्रों पर प्रभाव माना जाता है। ठाकुरों की सियासत भी इलाके में इनके इशारे पर ही चलती है। संभवतः यही कुछ ऐसी वजहें हैं जिनके चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बृजभूषण के रिश्ते बहुत मधुर नहीं रहे है। क्योंकि योगी आदित्यनाथ पर भी ठाकुरवादी सियासत करने का ठप्पा लगता है। पूर्व में दिये गए बृजभूषण के बयान ही उनके बीच के रिश्तों को बयां करने के लिए काफी हैं। अक्सर वो सरकार की खामियों और मुख्यमंत्री योगी की नीतियों पर कटाक्ष करते रहते हैं। लेकिन महज हफ्ते दस दिन के भीतर न जाने क्या ऐसा हुआ कि बृजभूषण लगभग तीन वर्षों के विरोधी अंतराल के बाद अपने विरोधी माने जाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने उनके लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर पहुँच गए। इतना ही नहीं हफ्ते भर के भीतर उनके दोनों लड़के सांसद करण भूषण और विधायक प्रतीक भूषण की मुलाकात भी मुख्यमंत्री योगी से हो गई। इस तरह महज चंद रोज में घटित हुए ये सियासी घटनाक्रम यह बताने के लिए काफी है कि आखिर बृजभूषण अचानक योगी शरणं गच्छामि की स्थिति में क्यों आ गए।
हालांकि इस स्थिति को समझने के लिए और भी पहलुओं का विश्लेषण करना होगा। मसलन योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से परिचित लोग यह बखूबी जानते है कि योगी अपने विरोधियों को रास्ते में कभी बाइपास का विकल्प नहीं देते हैं। सो बृजभूषण के योगी विरोध या सरकार विरोध को जानने के बावजूद उनसे कोई बातचीत का वैकल्पिक रास्ता पहले नहीं चुना गया। बृजभूषण ने भले दिया हो लेकिन योगी ने बृजभूषण को लेकर कभी कोई सीधा बयान नहीं दिया। बृजभूषण के इलाके में करोड़ों-अरबों के ठीके निरस्त कर दिए गए। पीडब्लूडी के कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाइयाँ भी हुई। इन कार्रवाइयों से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर बृजभूषण के आर्थिक आधार पर चोट पहुंची। इस तरह की कार्रवाइयों में जब इजाफा होने लगा तो बृजभूषण का माथा ठनका। उन्होंने यू टर्न लेते हुए योगी से मुलाकात की। इसके बाद अपने विधायक और सांसद बेटों को भी मुख्यमंत्री से मिलने के लिए भेजा।
सियासी जानकार मानते है कि बृजभूषण इन्ही परिस्थितियों के चलते योगी आदित्यनाथ के करीब जाने को मजबूर हुए। कहने वाले ये भी बता रहे हैं कि यहाँ बृजभूषण एक तीर से कई निशाने लगाने की फिराक में हैं। वो इस पर भी आशान्वित हैं कि अगर प्रदेश में प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार हुआ तो संभवतः उनके विधायक बेटे का समायोजन हो जाए। विस्तार को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है, लेकिन अभी तक नहीं हो पाया है। जानकार बताते हैं कि अगर विस्तार हुआ तो इस बात की संभावना अधिक है कि ब्रजभूषण शरण सिंह के गोंडा सदर से विधायक बेटे प्रतीक भूषण को मंत्रिमंडल में जगह मिल जाये।
गोंडा, बलरामपुर और कैसरगंज संसदीय क्षेत्र से लगभग आधा दर्जन बार सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह कुश्ती संघ के विवाद के चलते पिछला चुनाव नहीं लड़ सके थे। पार्टी ने उनकी सीट से उनके बेटे करण भूषण सिंह को उतारा था। सियासत के साथ-साथ ब्रजभूषण शरण का शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा योगदान है। उनके इलाके में लगभग 5 दर्जन शिक्षण संस्थान चल रहे है, जहां लाखों-लाख छात्र-छात्राएँ अध्ययनरत हैं। ऐसे में सियासी जानकार ब्रजभूषण के योगी शरणम गच्छामी की जो वजहें गिना रहे हैं उनमे दम है। बाकी वास्तव में वजह क्या है ये तो समय के गर्भ है। समय पर ही पता चल सकेगा।

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