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June 20, 2026
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सपा-सुभासपा संबंध : रार बनी दीवार

By Shakti Prakash Shrivastva on July 8, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

योगी सरकार 01 में भाजपा की साझेदार रही सुभासपा योगी सरकार 02 में सरकार के साथ नही है। विधानसभा चुनाव के पहले ही सरकार से पल्ला झाड़ते हुए सुभासपा (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) ने विशेष अंदाज में सपा गठबंधन की साझेदारी स्वीकारी थी। उन दिनों सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के बयानों का विश्लेषण करे तो ऐसा जान पड़ता था कि कि उनकी यानि उनके गठबंधन की सरकार आनी तय है। मार्च से जुलाई आते-आते भाजपा सहित योगी आदित्यनाथ पर मर्यादित-अमर्यादित टिपपड़ियों की बौछार करने वाले ओम प्रकाश राजभर को अब सपा गठबंधन से भी उबकाई आने लगी है। उनके और सपा सुप्रीमो अखिलेश के बीच चल रही रार अब दीवार बन गयी है। अखिलेश यादव और उनके बीच संबंधों में तल्खी का एहसास तो हालांकि विधान परिषद चुनाव के दौरान ही होने लगा था। क्योंकि राजभर सपा गठबंधन की जिताऊ चार सीटों में से एक सीट अपने लड़के के लिए चाहते थे लेकिन अखिलेश ने उनकी ये डिमांड पूरी नहीं की। इस पर आक्रोशित राजभर का बयान आया कि 34 सीटों में महज आठ सीट पर जीत हासिल करने वाले को राज्यसभा की सीट और चौदह में से छः जीतने वाले की अनदेखी क्यों। राजभर इतने पर नही रुके अजमगढ़ उप चुनाव के नतीजे पर तल्ख राजभर ने कहा कि अखिलेश यदि आजमगढ़ गए होते तो हम चुनाव जीत जाते। मैं अपनी पार्टी के तीन सौ कार्यकर्ताओं को लेकर बारह दिन तक चुनाव प्रचार में लगा रहा। ये एसी में आराम करते रहे। मेरा मानना है कि इनके जाने से हम चुनाव जीत सकते थे। इस पर सपा सुप्रीमो ने पलटवार करते हुए कहा कि हमे किसी के सलाह की जरूरत नही है। गुरुवार को लखनऊ में विपक्ष के राष्ट्रपति उम्मीदवार यशवंत सिन्हा की बैठक में भी राजभर नही पहुंचे। न पहुँचने पर उनका तर्क था कि मैं तो अपने पार्टी के विधायकों के साथ लखनऊ पहुँच चुका था लेकिन कोई सूचना ही नहीं दी गयी। बहरहाल उन्होने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद निर्णय करेंगे कि क्या करना है।

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