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October 7, 2026
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वाकई संकट के मुहाने पर ‘सपा’!

By on April 22, 2022 0 579 Views

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

               लोकतान्त्रिक व्यवस्था में किसी सरकार के सफल संचलन में सत्ताधारी पार्टी के साथ-साथ उसके विपक्षी दलों की भी अहम भूमिका होती है। खासकर मजबूत विपक्ष की। क्योंकि विपक्ष की कमजोर होने की दशा में सत्ताधारी दल के निरंकुश होने की संभावना रहती है जिसे लोकतान्त्रिक व्यवस्था के लिए आदर्श नहीं माना जाता है। लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे यानि उत्तर प्रदेश की बात करे तो यहाँ मौजूदा हालात कुछ ऐसी स्थितियां बनने की ओर ही इशारा कर रही है। प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी की तस्वीर कुछ ऐसे ही बनती दिख रही है जो आदर्श राजनीतिक व्यवस्था के लिए शुभ नहीं है। प्रदेश में नई बीजेपी सरकार के बने अभी जुमा-जुमा एक महीने भी नहीं बीते है कि सरकार में प्रमुख विपक्षी समाजवादी पार्टी के अंतर्कलह के दलदल में धँसने के समाचार आने लगे। ऐसी स्थितियों की शुरुआत पार्टी के बुनियाद में अपना अहम योगदान देने वाले कद्दावर मुस्लिम चेहरे मोहम्मद आजम खान के शुभचिंतकों की तरफ से हुई। आजम के मीडिया प्रभारी फसाहद अली खान शानू ने बकायदे प्रेस कांफ्रेंस करके अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि श्री यादव और उनकी पार्टी ने मुस्लिमों और मो.आजम खान के साथ धोखा किया है। शानू के बाद पार्टी के पदाधिकारी मो. इरशाद सहित प्रदेश भर से इसके समर्थन में विरोध के स्वर उठने लगे। कही विरोध प्रदर्शन हो रहे है तो कही समर्थन में खून से खत लिखे जा रहे है। मो.आजम चूंकि पार्टी के मजबूत और लोकप्रिय मुस्लिम नेता है और पार्टी उन्ही का चेहरा आगे रख कर मुस्लिमों की नुमाइंदगी का दंभ भरती है। यादव के बाद मुस्लिम ही पार्टी का सबसे विश्वसनीय वोट बैंक भी है। अभी पार्टी इस बाबत कुछ करने की सोचे इसी बीच बुधवार को पार्टी के पिछले विधानसभा चुनाव में गठबंधन की प्रमुख साझेदार राष्ट्रीय लोकदल सुप्रीमो जयंत चौधरी ने रामपुर जा मो.आजम खान के परिवारीजनों से मुलाकात की। आजम की पत्नी डॉ तनजीम फातिमा और विधायक बेटे अब्दुल आजम से हुई मुलाकात को राजनीतिक हल्के में पार्टी में सब कुछ सामान्य न होने के रूप में देखा जाने लगा। इतना ही नहीं 2017 विधानसभा चुनाव के पहले से ही समाजवादी पार्टी की खिलाफत कर रहे पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव जो 2022 विधानसभा चुनाव के ठीक पहले न केवल सपा गठबंधन में शामिल हुए बल्कि सपा के सिंबल से इटावा जिले की जसवंतनगर सीट से चुनाव भी लड़े और जीते। उन्होंने भी शुक्रवार को सीतापुर जेल में जाकर जेल मे बंद मो आजम खान से मुलाकात की। लगभग एक घंटे की मुलाकात के बाद जेल से बाहर आ शिवपाल ने मीडिया से मुखातिब हो आजम के साथ हुई नाइंसाफी के लिए पार्टी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पार्टी के संस्थापक सदस्य और विधानसभा में सर्वाधिक वरिष्ठ सदस्य होने के बाद भी समाजवादी पार्टी ने उनके लिए कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा में सदस्य है लेकिन कही भी आजम खान के मुद्दे को पार्टी की तरफ से नहीं रखा गया। अपने बड़े भाई मुलायम सिंह को भी इसके लिए कठघरे में खड़ा करते हुए शिवपाल ने कहा कि उन्हे भी धरना देना चाहिए था। चूंकि देश जानता है कि प्रधानमंत्री जी मुलायम सिंह जी का सम्मान करते है। यदि वो ऐसा करते तो आजम भाई की मदद हो सकती थी। शिवपाल के इस बयान के बाद अब काफी हद तक स्पष्ट हो गया है कि पार्टी में अंदरखाने स्थितियाँ बदल गई है। ये सब इस बात की भी तसदीक कर रही है कि पार्टी कमजोर होने की राह पर चल पड़ी है। ऐसे में अब पार्टी हाइकमान को यह तय करना पड़ेगा कि पार्टी को और दलदल में धँसने से पहले कैसे पूर्ववत मजबूत रखा जाए।

 

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