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ढह जाएगा अखिलेश का यादव किला !

By Shakti Prakash Shrivastva on February 11, 2025
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                                                                                  शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव  

उत्तर प्रदेश की सियासत में लगभग चार दशकों से प्रभावी यादव किला को ढहाने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए सियासी चौपड़ पर अरसे पहले से ही बिसातें बिछाने की शुरुआत बीजेपी ने कर दी थी। अब हालिया चुनाव परिणामों में उसका असर दिखने भी लगा है। पिछले दो उपचुनाव के परिणामों से यह साबित हो गया है कि सूबे के यादव वोटरों को अपना पिछलग्गू मानने वाले सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव यादव बाहुल्य इलाके में ही चुनाव हार रहे है। इतना ही नहीं यादवों के अलावा मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में भी सपा को हार का मुंह देखना पड़ रहा है। ऐसा होने के पीछे की वजह बीजेपी की विशेष रणनीति है।
बीजेपी ने इस मास्टर स्ट्रोक की रणनीति मध्य प्रदेश चुनाव के दौरान ही बना ली थी। क्योंकि विपक्षियों द्वारा लगातार बीजेपी के ऊपर यादवों और मुसलमानों की अनदेखी के आरोप लगता रहा है। अपने ऊपर लगे इन आरोपों को बीजेपी अब गलत साबित करने पर आमादा है। इसी के लिए बीजेपी ने ऐसी रणनीति बनाई जिसका परिणाम भी अब दिखने लगा है। मध्य प्रदेश में यादव बिरादरी से मोहन यादव को मुख्यमंत्री बना कर इसकी शुरुआत बीजेपी ने कर दी थी। बीजेपी के इस सियासत का असर उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा चुनावों के अलावा हाल में हुए यूपी के उपचुनावों में भी दिखा। मिल्कीपुर में मिली जीत का आलम ये है कि जितने वोट सपा को मिले लगभग उतने ही वोटों से बीजेपी ने वहाँ जीत दर्ज की। वहाँ मुकाबला एकतरह से एकतरफा ही रहा। समाजवादी पार्टी की सारी की सारी नीति और रणनीति यहाँ फेल हो गई। न अखिलेश यादव का प्रचार काम आया और न ही डिंपल यादव का रोड शो ही कुछ कर सका। बल्कि इनके एवज में बीजेपी का हर दांव हिट रहा। बीजेपी का हिंदुत्व कार्ड भी चला और सामाजिक समीकरण भी बखूबी क्लिक किया। महाकुंभ में भगदड़ के बहाने योगी सरकार की सनातन विरोधी छवि बनाने की अखिलेश की कोशिश भी काम नहीं आई।
मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों से प्रदेश समेत देश की सियासत में एक संदेश गया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न केवल एक बेहतर मुख्यमंत्री हैं बल्कि एक कुशल सियासी रणनीतिकार भी हैं। यूपी में बीजेपी आलाकमान की रणनीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल कोआर्डिनेशन में प्रदेश में हो रहे उपचुनावों के नतीजे बीजेपी के पक्ष में आना पार्टी के लिए सुखद है। नौ विधानसभा के लिए हुए उपचुनावों में पार्टी को सात सीटों पर विजय मिली थी जबकि दिल्ली विधानसभा चुनाव के साथ हुए मिल्कीपुर उपचुनाव में भी पार्टी ने रिकार्ड जीत दर्ज की है। करहल विधानसभा में भले ही सपा को जीत मिली थी लेकिन बीजेपी के वोट फीसद में वहाँ भी इजाफा हुआ था। इस तरह से लगातार यह देखा जा रहा है कि यादव और मुस्लिम बाहुल्य इलाके में भी बीजेपी को सियासी बढ़त मिल रही है। सियासी जानकारों का ऐसा मानना है कि इस तरह तो सपा का यादव किला जो दरक गया है वो एक दिन ढह जाएगा।

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