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October 8, 2026
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नितीश की ‘ना’ पर भी सियासत

By Shakti Prakash Shrivastva on January 8, 2025
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                                                                          शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू यानि जनता दल यूनाइटेड सुप्रीमो नितीश कुमार देश के एकमात्र ऐसे नेता है जिनकी लोकप्रियता अलग किस्म की है। आज सियासत में उनकी स्थिति ये है कि उनकी एक-एक गतिविधियां मीडिया की सुर्खियां बनती है। यहाँ तक कि उनकी हाँ और ना जैसे नितांत व्यक्तिगत निर्णयों पर भी सियासत के समीकरण बनते हैं।

हाल ही मे उनकी एक वायरल तस्वीर को लेकर इतनी सियासत हुई कि लगा जैसे बिहार की सत्ता बदल रही है। खबरिया मंचों पर नितीश के इस्तीफे तक की खबरे अपने-अपने ढंग से परोसे जाने लगे। बीते चंद दिनों में ही सियासत के गलियारे में तरह-तरह की खबरे बिहार और नितीश कुमार को लेकर आ रही थीं। कभी ये कि मुख्यमंत्री नितीश ने एक बार फिर पलटी मारी, बीजेपी हाइकमान से नाराज, दिल्ली जाकर भी बिना बीजेपी आलानेताओं से मिले पटना वापस हुए, बीजेपी गठबंधन से अलग हुए, राजद के साथ बनाया गठबंधन, राजद के सहयोग से फिर बने मुख्यमंत्री जैसी न जाने कितनी खबरे। यहाँ तक खबर आई कि राजद सुप्रीमो लालू यादव से मिले और भविष्य की रणनीति पर हुई चर्चा। मुलाकात के दौरान लालू यादव ने नितीश को खुलकर साथ आने का न्योता भी दिया। जबकि इन सभी चर्चा-कुचर्चाओं का लबबों-लुआब ये है कि रविवार को मुजफ्फरपुर में अपनी प्रगति यात्रा के दौरान नितीश ने खुलकर लालू यादव के आफ़र जैसी चर्चा पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि दो बार उनके साथ चले गए थे अब इधर-उधर कही नहीं जाएंगे। अब नितीश की इस ‘ना’ पर भी सियासत शुरू हो गई है। एक तरफ जहां राजद का मानना है कि नितीश को कौन बुला ही रहा है, वहीं बीजेपी और जेडीयू की मुताबिक लालू यादव डरे हुए हैं इसलिए इस तरह का आफ़र दे रहे हैं। कांग्रेस यह कह कर सियासत में बनी रहना चाहती है कि नितीश जब ना कहते है तो उसका मतलब ना नहीं होता है।

नितीश कुमार कि जिस ना वाले बयान पर सियासत शुरू हुई है। उसे नितीश ने मुजफ्फरपुर में रविवार को कहा। नितीश अपनी प्रगति यात्रा के तहत रविवार को मुजफ्फरपुर पहुंचे। उन्होंने जिला वासियों को लगभग साढ़े चार सौ करोड़ के योजनाओं की सौगात देते हुए मीडिया द्वारा लालू के आफ़र वाले बयान पर सीधे कहा किहम दो बार गलती से उनके साथ चले गए थे अब पुराने साथी के साथ आ गए हैं। अब उधर कभी नहीं जाएंगे। लालू-राबड़ी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन लोगों ने महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया। शाम में कोई घर से बाहर नहीं निकलता था। विकास का सब काम सत्ता में आने के बाद हमने किया। इस बयान के बाद से ही बिहार की सियासत ठंड मौसम में भी गरमा गई है। कांग्रेस ने कहा कि नितीश जब विराम लगाते है तो समझिए अंगड़ाई लेने वाले हैं। वे जब ना कहते है तो उसका मतलब ना नहीं होता है। इस पर राजद प्रवक्ता की टिप्पणी काफी तीखी है। नितीश जी किसी मुगालते में है कि राजद उनको लेने जा रही है। तेजस्वी जी ने तो साफ कह दिया है कि नितीश जी अपनी विदाई यात्रा पर निकल चुके है। इनके सभी टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए जेडीयू ने कहा कि अगली सरकार भी प्रदेश में नितीश कुमार की ही बनने जा रही है। जबकि बीजेपी ने कहा कि लालू यादव डरे हुए है इसलिए ऐसा आफ़र दे रहे हैं। वो अपने बेटे को स्थापित करना चाहते है लेकिन बिहार की जनता जिसे चाहेगी उसे ही स्थापित करेगी। एक व्यक्ति की सहमति-असहमति पर इस तरह की सियासी टिप्पणियाँ यह दर्शाती है कि उसका यानि नितीश कुमार का वाकई जनाधार है।

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