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खलेगी जमीनी ‘बादल’ की कमी

By Shakti Prakash Shrivastva on April 26, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

       जीवन में पिचानबे बसंत देख चुके शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अब नहीं रहे। 25 अप्रैल की रात को मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में उन्होने अपनी अंतिम सांस ली। बादल जी का जन्म 8दिसंबर 1927 को पंजाब के मुक्तसर जिले के अबुल खुराना गाँव में हुआ था। पंजाब की सियासत में पाँच बार मुख्यमंत्री रहे बादल के नाम जहां प्रदेश के सबसे कम उम्र का मुख्यमंत्री होने का रिकार्ड है वहीं सबसे अधिक उम्र का मुख्यमंत्री होने का भी रिकार्ड है। आमजन में अपनी विशिष्ट कार्यव्यवहार के नाते लोकप्रिय रहे बादल साहब की कमी आज आम और खास दोनों को महसूस हो रही है। प्रदेश और देश की सियासत को भी आनेवाले दिनों में उनकी कमी खलेगी। क्योंकि पंजाब की सियासत में एक नई किस्म की सियासती ककहरा दे बादल साहब सदा-सदा के लिए अमर हो गए है। उन्होने ने ही हिंसा की आग में जल रहे पंजाब में हिन्दू-सिख भाईचारे की नींव डाल शांति की सियासी जमीन तैयार की थी।

देश के समृद्धि प्रदेशों में शुमार पंजाब की सियासत में प्रकाश सिंह बादल का नाम यूं ही नहीं बाबा बोहड़ विशेषण से नवाजा जाता है। कुछ न कुछ तो था उनमे। बेशक उनके नाम में बादल शब्द लगा हुआ है लेकिन उनके व्यक्तित्व की जमीनी सच्चाई ये है की वो निहायत जमीनी इंसान थे। बादल और जमीन का ऐसा संयोग इनके व्यक्तित्व में था जिसका हर आम और खास मुरीद था। रिश्ते की जितनी बारीक परख और उसे निभाने की जो कला बादल साहब में थी वो कलियुगी काल में किसी मिसाल से कम नहीं है। इनके चाचा की एक लड़की यानि इनकी एक चचेरी बहन बीबी परमजीत कौर की शादी पंजाब से दूर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुई है। दूर होते हुए भी रिश्ते निभाने की कला में माहिर बादल साहब ने यह एहसास नहीं होने दिया की वो बहन अन्य बहनों से दूर है। बहन के कहने पर उन्होने गोरखपुर-मगहर के पास शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी अमृतसर की तरफ से संत कबीर जी के नाम पर दुनिया का इकलौता गुरुद्वारा गुरुद्वारा भगत कबीरजी का निर्माण करवाया। समाज में जहां सगी बहनो के साथ भाइयों के रिश्ते को तार-तार करने वाली खबरे देखने सुनने को मिलती है। वहाँ ऐसा रिश्ता एक मिसाल है। उन्होने न केवल अपनी इस बहन के लिए गुरुद्वारा बनवाया बल्कि उसे इस गुरुद्वारा का एडमिनिस्ट्रेटर भी बनाया। बहन राना तो उनके रिश्ते याद कर भावुक हो जाती है। कहती है की उन्होने बड़े भाई और पिता दोनों का ही प्यार दिया। उन्होने कभी यह एहसास नहीं होने दिया की वो चाचा की बेटी है। बादल साहब पारिवारिक माहौल में जीतने संजीदे थे उतने ही सियासत में भी थे। शिरोमणि अकाली दल के गठन के बाद से ही उनके नेतृत्व में पार्टी उत्तरोत्तर मजबूत होती गई। लगभग साढ़े चार दशक तक वो पंजाब की सियासत में मजबूत बने रहे। पंजाब में हिन्दू-सिख भाईचारे की मजबूत नींव उन्ही की देन है। अपनी विशिष्ट व्यवहार के नाते वो विरोधियों के भी उतने ही प्रिय थे जीतने अपनों में। यही वजह है कि उनके निधन पर समूचा देश शोकाकुल महसूस कर रहा है। केंद्र सरकार ने पूरे देश में दो दिन का राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाकर उनके पार्थिव शरीर पर अपनी श्रद्धांजलि दी है।

 

 

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