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सपा ने “छद्म सियासत” से ढहाई भगवा ब्रिगेड की दीवार

By Shakti Prakash Shrivastva on July 11, 2024
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                                                                                           शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

यह सच है कि सियासत में सबकुछ जायज है। यहाँ भी परिणाम ही महत्वपूर्ण होता है। परिणाम के लिए छद्म सियासत को भी बुरा नहीं माना जाता है। इस बार के बीते लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की सियासत में इस छद्म सियासत का बखूबी नजारा देखने को मिला। उत्तर प्रदेश में इस सियासत का मुजाहरा कराया सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के इस नयी सियासी चाल ने बीजेपी के भगवा खेमे को धूल चटा दी। गाँव के बूथ-बूथ तक पार्टी कैडर और पन्ना प्रमुख जैसे पद गढ़ने वाली बीजेपी को अंत तक तक समझ ही नहीं आया और उसकी बाजी कब पलट गयी।

यकीन मानिए इस बार उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव किसी ‘गुरिल्ला वॉर’ की तरह लड़ा गया। समाजवादी पार्टी की तरफ से बार-बार प्रत्याशियों का टिकट बदलने की ‘कैमोफ्लाज पॉलिटिक्स’ यानि छद्म सियासत के जरिए जिस तरह से सियासी चौपड़ बिछाई गई। उसमें बीजेपी पूरी तरह उलझ कर रह गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक लगभग दस लोकसभा सीटें ऐसी थी जहां सपा अंत तक उम्मीदवारों में फेरबदल करती रही। गौतमबुद्धनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बदायूं से लेकर मिश्रिख, सुल्तानपुर, श्रावस्ती तक हर सीट पर अखिलेश यादव ने टिकट बदले। सियासी गलियारे में उस दौरान इसे अखिलेश यादव की भ्रमित स्थिति माना गया। यह भी कहा गया कि टिकट बंटवारे में अनिर्णय की इस स्थिति से समाजवादी पार्टी को नुकसान होगा। लेकिन नतीजा सामने आया तो अखिलेश यादव की यही कमजोरी अहम रणनीति के रूप में चर्चित हो गई। अखिलेश की रणनीति ये थी कि प्रत्याशी चयन तो पहले ही हो गया था लेकिन विरोधियों को भरमाने के लिए ऐसी चाले चली गई। मुरादाबाद, रामपुर, बदायूं, सुल्तानपुर और श्रावस्ती में पार्टी की जीत में इस रणनीति का अहम योगदान माना गया।

अखिलेश ने टिकट बदलने की शुरुआत गौतमबुद्ध नगर से की। पहले उन्होंने डॉ महेंद्र नागर फिर राहुल आवाना फिर से डॉ महेंद्र नागर को प्रत्याशी घोषित कर दिया। मेरठ में भी पार्टी ने दो बार प्रत्याशी बदला। पहले भानु प्रताप फिर सरधना से विधायक अतुल प्रधान और आखिर में फिर से पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी सुनीता वर्मा को उम्मीदवार बनाया।

इसी तरह बागपत में पहले मनोज चौधरी को टिकट दिया फिर बदलकर अमरपाल शर्मा को प्रत्याशी बना दिया। बिजनौर में पहले पूर्व सांसद यशवीर सिंह पर दांव लगाया फिर उन्हें हटाकर नूरपुर से सपा विधायक राम अवतार सैनी के बेटे दीपक सैनी को प्रत्याशी बना दिया। लेकिन इन सभी जगहों पर पार्टी को शिकस्त मिली अलबत्ता मुरादाबाद और रामपुर में पार्टी को प्रत्याशी बदलने का लाभ मिला। मुरादाबाद में पहले सांसद एसटी हसन उम्मीदवार थे बाद में उनकी जगह रुचि वीरा ने ली और चुनाव भी जीती। इसी तर्ज पर रामपुर में मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को अपना प्रत्याशी बनाया और वो विजयी भी रहे। बदायूं में पहले धर्मेंद्र यादव फिर शिवपाल यादव और बाद में उनके बेटे आदित्य यादव को टिकट दिया और वो सांसद बन गए। हालांकि सीतापुर की मिश्रिख सीट पर तीन-तीन बार प्रत्याशी बदलने के बावजूद पार्टी को हार का स्वाद चखना पड़ा।

इसी तरह सुल्तानपुर और श्रावस्ती सीट पर भी बदलाव पार्टी ने किया और नए प्रत्याशी ने बीजेपी प्रत्याशी को हराकर सीट सपा की झोली में डाल दी। इस तरह सपा ने अपनी इस नई चाल से बीजेपी के सपने को तार-तार कर दिया।

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