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अपने सियासी वजूद को नए सिरे से गढ़ेंगे जेल से निकले ‘आजम’

By Shakti Prakash Shrivastva on May 22, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

अपनी सभी मुकदमों में जमानत पा चुके समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मो. आजम खान आखिरकार जेल से रिहा हो गए। जेल में रहते हुए जिस तरह से आजम ने शिवपाल यादव से मुलाकात और सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा से मिलने से इनकार कर प्रदेश की खासकर मुस्लिम सियासतदारों के पेशानी पर बल लाने का कार्य किया था। उससे एक बात साफ है कि प्रदेश की राजनीति के धुरंधरों में शुमार मो आजम अब मुस्लिम सियासत को नए सिरे से धार देने की तैयारी में हैं। समय-समय पर उन्होंने जेल में रहते हुए इसका इजहार भी किया। सीतापुर जेल से रिहा होते ही आजम ने जौहर विश्वविद्यालय, मदरसों की हालत और शिक्षा, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का जिक्र कर इस बात का आगाज कर दिया कि उन्हे मुस्लिमों की शिक्षा की पैरोकारी का सिला जेल जाने के रूप में मिला। उन्होंने अपने लगभग हर बयान में कहीं न कहीं यह बताने की कोशिश की कि वो मुस्लिमों की शिक्षा के असली पैरोकार है। बयानों-बयानों में वह नई पीढ़ी से खुद को जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मुसलमानों की तबाही के लिए उनका वोट देने का तरीका भी जिम्मेदार है। यह बात इससे पहले मुस्लिम संगठन भी उठा चुके हैं। ऐसे में सियासी नब्ज पर नजर रखने वालों का कहना है कि 26 माह 23 दिन जेल में रहने के बाद आजम खां अपनी सियासी पकड़ को फिर से मजबूती देना चाहते हैं। इसके लिए उनका मुसलमानों की शिक्षा पर बात करना जरूरी है। आजम खां खुद के 10 बार से विधायक होने का हवाला देते हैं तो यह अनायास नहीं है। सियासी जानकारों का कहना है कि उन्हें किसी न किसी रूप में इस बात का अहसास है कि उनके जेल जाने के बाद सपा में कई मुस्लिम चेहरे चमके हैं। ऐसे में खुद की ताकत को लेकर वह नया फंडा अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। आजम खां ने खुद पर हुए हमले से लेकर हेलीकाप्टर दुर्घटना और जेल में कोविड की चपेट में आने का जिक्र करके खुद के जिंदा होने की वजह समाज की दुआएं बताई हैं। यह भी उनकी सियासी रणनीति का हिस्सा है। भले ही आजम सपा विधायक होते हुए भी विधायकों की बैठक में शामिल नहीं हुए लेकिन एक सोची-समझी रणनीति के तहत वो बजट सत्र में सुर्खियों में रहेंगे। उन्हें लेकर सपाइयों ही नहीं विपक्षियों में भी कौतुहल बना हुआ है। जेल से छूटने के बाद उन्होंन साफ कहा कि जेल में दाल नहीं सिर्फ पानी मिलता है। इससे साफ है कि वजह सदन में अपनी जेल यात्रा का जिक्र करने से भी गुरेज नहीं करेंगे। ऐेसे में उनकी जेल से जुड़े संस्मरण भी अहम होंगे। इससे इतर आजम अपने विधायक बेटे अब्दुल्लाह आजम खां के भविष्य को लेकर भी फिक्रमंद हैं। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद वह नई राह पकड़ेंगे, इस पर संशय है। यह भी कहा जा रहा है कि आजम खां सपा के संस्थापक रहे तो जब भी सपा सरकार बनी, उनके सियासी कद का हमेशा ध्यान रखा गया। सपा सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा और विधान परिषद पर भी आजम खां की निगाह है। रामपुर से उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दिया है। ऐसे में यहां उप चुनाव होना है। जाहिर है कि आजम खां रामपुर लोकसभा उपचुनाव पर मनपसंद उम्मीदवार चाहेंगे। हालांकि उपचुनाव में परिवार के किसी व्यक्ति के मैदान में उतरने की संभावना नहीं है। वह राज्यसभा व विधानसभा या विधान परिषद में परिवार या अपने खास व्यक्ति को भेजने की ख्वाहिशमंद जरूर हैं।
आजम ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मैं उन सभी का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मेरे लिए प्रार्थना की और अपनी सहानुभूति दी। चाहे वह सपा, बसपा, कांग्रेस, टीएमसी, या यहां तक कि भाजपा हो, सभी दलों को समाज के कमजोर लोगों के बारे में सोचने की जरूरत है।

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