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दिल्ली के नए सीएम रविकिशन !

By Shakti Prakash Shrivastva on February 13, 2025
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                                                                           शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

सियासत एक ऐसा क्षेत्र है जिसमे कयासबाजी के लिए सर्वाधिक संभावनाएं होती हैं। इनमे भी मीडिया की भूमिका अहम होती है। किसी भी नेता के बयान या सियासी गतिविधियों के निहितार्थ ही अक्सर इनकी कयासों का आधार बनती है। दिल्ली के विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही सियासी गलियारे में कौन होगा दिल्ली का मुख्यमंत्री को लेकर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया है। कयासबाजी में जिन नवनिवाचीत विधायकों या सांसदों के नाम सर्वाधिक सुर्खियां बटोर रहे है उनमे प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, विजेंद्र गुप्ता, पवन शर्मा, अरविन्दर सिंह लावली, राजकुमार चौहान, रेखा गुप्ता, सतीश उपाध्याय, मनोज तिवारी जैसे नाम प्रमुख है। सुर्खियां बटोर रहे इन नामों में एक नया नाम गोरखपुर से सांसद रवि किशन का भी जुड़ गया है।

हाल के वर्षों में ऐसा देखा जा रहा है कि बीजेपी अपने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सहित मंत्रियों के नामों के चयन में खासा सतर्कता बरतने लगी है। अब प्रमुख नामों के चयन में जाति, धर्म, क्षेत्र सहित आरक्षण आदि का विशेष महत्व रखा जाता है।

इस बार दिल्ली विधानसभा के चुनाव में कुल सत्तर सीटों में अड़तालीस सीट पर बीजेपी और बाईस सीटों पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी। चूंकि सरकार बनाने के लिए आवश्यक आंकड़ों पैंतीस से कहीं अधिक सीटें बीजेपी के पास है लिहाजा सरकार गठन में बीजेपी को किसी दिक्कत का सामना नहीं करना है। अब बीजेपी को सबसे पहले नए मुख्यमंत्री का चयन करना है। इसमे उसे पार्टी नीतियों के तहत नामों पर विचार करते हुए किसी एक नाम को तय करना होगा। चूंकि सत्ताईस सालों की कड़ी मशक्कत के बाद एक बार फिर बीजेपी को सरकार चलाने का अवसर मिला है लिहाजा बीजेपी दिल्ली में एक मजबूत सरकार बनाने का काम करेगी।

हालांकि मुख्यमंत्री चयन पर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे पर से वापस आने के बाद ही लगेगी लेकिन तब तक इसको लेकर दिल्ली में गहमागहमी का माहौल बना हुआ है।

इस बार जिस तरह दिल्ली के जाट, ब्राह्मण, उत्तर प्रदेश-बिहार के पूर्वांचलियों सहित दलित, पिछड़ा और महिलाओं ने खुलकर पार्टी को समर्थन दिया है। इसलिए पार्टी इन तबके में से किसी एक को मुख्यमंत्री बना कर बाकि अन्य को महत्वपूर्ण पदों पर समायोजित कर सकती है। ऐसे में ब्राह्मण तबके से रविकिशन शुक्ल का नया नाम भी चर्चा में शामिल हो गया है। रवि किशन इन दिनों गोरखपुर से सांसद हैं। रविकिशन का नाम आने के पीछे जो कारण बन रहे है उनमे एक तो ब्राह्मण है जिस संवर्ग का इस बार खासा समर्थन पार्टी को मिला है। हालांकि पार्टी के जीते ब्राह्मण चेहरों में पवन शर्मा और सतीश उपाध्याय सरीखे नाम है। लेकिन रविकिशन को लाकर पार्टी एक तीर से कई निशाना साध सकती है। मसलन रविकिशन के माध्यम से पार्टी चुनाव प्रचार में अपनी शैली से आम मतदाताओं पर विशेष प्रभाव रखने में कामयाब रहे फायर ब्रांड मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी संतुष्ट कर सकती है साथ ही यूपी-बिहार के मतदाताओं को भी। फिल्मी छवि से मिली रविकिशन की आम जनता के बीच लोकप्रियता भी पार्टी के पक्ष में होगी। हालांकि प्रतिष्ठित भोजपुरी लोक कलाकार और सांसद मनोज तिवारी भी दावेदारी में है लेकिन कई ऐसे बिन्दु है जिनके चलते मनोज पर आज भारी पड रहे है रविकिशन। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि रविकिशन शुक्ल के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा के पुत्र और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के संयोजक को हराने वाले जाट नेता प्रवेश सिह वर्मा सहित महिलानेत्री रेखा गुप्ता की मानी जाने वाली अंतिम दावेदारी में भी अनंतिम बाजी किसके हाथ लगती है। कयासों वाले रविकिशन बनते है या फिर कोई मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान जैसे कोई और।

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