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मायावती के TWEETS : मुस्लिमों को साधने की तड़प

By Shakti Prakash Shrivastva on August 24, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बसपा सुप्रीमों सुश्री मायावती इन दिनों अपनी पार्टी के जनाधार बढ़ाने को लेकर खासी चिंतित हैं। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनके पार्टी द्वारा किये गए प्रयोग को मिली करारी शिकसस्त से मायावती भीतर-भीतर तिलमिला सी गयीं हैं। उन्हें इस बात का बखूबी इल्म हो गया है कि उनके कैडर वोट जो बीजेपी के गोद में फिलहाल है वो उनकी तरफ आ भी सकते हैं लेकिन उन्हे चुनावी परिणाम के लिए अन्य आवश्यक जातिगत समीकरणों को भी साधना होगा। जाति-बिरादरी की राजनीति पर यकीन रखने वाली मायावती का विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों को साधने की कवायद के परिणाम शून्य निकले। लिहाजा अब वो दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाने की हर संभव कोशिश करने में जुट गयीं हैं। उन्हे मालूम है कि अभी भी प्रदेश का मुसलमान समाजवादी पार्टी के साथ है। यदि उन्हे यानि मायावती को मुस्लिमों का साथ चाहिए तो पहले मुस्लिमों को सपा से दूर करना होगा। इस दिशा में मायावती ने गंभीरता से प्रयास करना शुरू भी कर दिया है। इसी क्रम में मायावती द्वारा दो ट्वीट किये गए है। पहले ट्वीट तेलंगाना में बीजेपी के निलंबित विधायक टी राजा सिंह से संबंधित हैं। विधायक को निशाने पर रखते हुए मायावती ने मुस्लिम तुष्टीकरण का एक पासा फेंका है। ट्वीट में लिखा है कि अभी बीजेपी से निलंबित नुपूर शर्मा द्वारा पैगम्बर-ए-इस्लाम के विरुद्ध विवादित टिप्पणी पर देश भर में गर्माया माहौल पूरी तरह से ठंडा भी नहीं हो पाया है कि बीजेपी के अन्य नेता तेलंगाना के विधायक राजा सिंह ने उसी प्रकार का उत्तेजनात्मक कार्य किया है। जो अति-शर्मनाक व घोर निंदनीय है। उन्होंने आगे यह भी लिखा कि क्या यह बीजेपी नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं बनती है कि वह अपने लोगों को संयमित व नियंत्रित रखकर देश में अमन-शांति कायम रखने के साथ-साथ विदेशों में भारत की छवि को भी आघात लगने से बचाए। इतना ही नहीं मायावती अपने दूसरे ट्वीट में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को निशाने पर रखते हुए लिखती हैं कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख द्वारा आजमगढ़ जेल जाकर वहां कैद पार्टी के बाहुबली विधायक रमाकांत यादव से मिलकर उनसे सहानुभूति व्यक्त करने पर हर तरफ से तीखी प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है। यह इस आम धारणा को भी प्रबल करता है कि सपा इस प्रकार के आपराधिक तत्वों की संरक्षक पार्टी है। साथ ही, विभिन्न संगठनों व आम लोगों द्वारा भी सपा प्रमुख से यह सवाल पूछना क्या अनुचित है कि वे मुस्लिम नेताओं से मिलने जेल क्यों नहीं जाते हैं। जबकि उनका ही आरोप है कि यूपी बीजेपी सरकार में सपा नेताओं को फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल में कैद रखा जा रहा है। मायावती बीजेपी को अपना साफ्ट टारगेट मानती है जबकि सपा को सबसे अहम। उसकी मूल वजह भी यही है कि सपा का विरोध करते हुए वो मुसलमानों को अपने पाले में लाना चाहती है। वो सपा को खासकर अखिलेश यादव को मुस्लिम विरोधी साबित करने का कोई अवसर हाथ से नही जाने देना चाहती हैं। देखना दिलचस्प होगा कि मायावती की यह राजनीतिक दांव कितना परिणाम परक होगा और कब।

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