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UP चुनाव : मंत्री पद छोड़ बीजेपी सरकार से अलग हुए ओ पी राजभर फिर बीजेपी के साथ!

By Shakti Prakash Shrivastva on October 16, 2021
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव 

कहते है कि राजनीति में स्थायी तौर पर न तो कोई गैर होता है और न ही सगा। यह कहावत एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में देखने को मिल सकती है। जिस तरह धुर विरोधी रहे बहन मायावती और सपा नेता मुलायम सिंह यादव पिछली बार बीजेपी के खिलाफ चुनावी मंच साझा करते दिखे उसी तरह सपा में कभी एक-दूसरे को फूटी आँख न सुहाने वाले दुश्मन चाचा-भतीजा के आपस में मिलने की भी स्थिति बन रही है। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश सरकार गठन के वक्त काबीना मंत्री बनाए गए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश राजभर बाद के दिनों में सरकार पर तरह-तरह के आरोप मढ़ कर न केवल गठबंधन से अलग हुए बल्कि मंत्री पद भी छोड़ दिया था। राजभर द्वारा दिये गए हालिया बयानो पर गौर करे तो ऐसा लगता है कि वो भी एक बार फिर बीजेपी कुनबे के साथ सहयोगी बन सकते हैं। हालांकि इस बार उनका कहना है कि सहयोगी बनना सशर्त होगा।

शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में श्री राजभर का मानना है कि राजनीति में हर क्षण संभावना रहती है। राजनीति संभावनाओं का मंच है। मीडिया से मुखातिब उन्होने कहा कि क्या कभी कोई सोच सकता था कि उत्तर प्रदेश में एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे मायावती और मुलायम एक साथ आ सकते है लेकिन ऐसा हुआ बीजेपी का विजय रथ रोकने के लिए आपसी दुराव भुला दोनों ने मंच साझा किया। उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ वो सशर्त गठबंधन करने को तैयार है। राजभर ने कहा कि 27 अक्तूबर को मऊ के हलधरपुर में होने वाली भागीदारी संकल्प मोर्चा की महापंचायत रैली में गठबंधन की घोषणा की जाएगी। इसके पहले हर तरह के गठबंधन सरीखी संभावनाओं पर हम गंभीरता पूर्वक विचार कर रहे हैं। उनके मुताबिक सबका साथ-सबका विकास का दावा करने वाली बीजेपी, सपा, कांग्रेस और बसपा में से जो भी दल उनकी शर्तें स्वीकार करने को तैयार होगा उसके साथ गठबंधन की घोषणा रैली में की जाएगी। उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी अपने अधिकारों से वंचित पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को उनका अधिकार दिलाने के लिए भागीदारी संकल्प मोर्चा गठित किया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भ्रांति फैला रहे हैं कि मोर्चा टूट गया है, लेकिन 27 अक्तूबर की रैली में बाबू सिंह कुशवाहा,बाबूराम पाल, प्रेमचंद प्रजापति, रामसागर बिंद, कृष्णा पटेल सहित लोग एक मंच पर नजर आएंगे। गठबंधन के लिए अपनी शर्तो का खुलासा करते हुए उनका कहना है कि सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को लागू किया जाना, प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी, देश मे पिछड़ी जाति की जातिवार जनगणना, प्रदेश में घरेलू बिजली मुफ्त दिये जाने, सभी विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर तक मुफ्त शिक्षा, पुलिस की बॉर्डर सीमा समाप्त करने सहित पुलिस संगठन पर रोक हटाये जाने की मांगे उनकी मुख्य मांगे हैं। इसके अलावा होमगार्ड, पीआरडी और ग्रामीण चौकीदार को पुलिस के बराबर वेतन व भत्ते दिए जाएं। योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांग जन कल्याण मंत्री रहे ओमप्रकाश राजभर इस बार गठबंधन को लेकर काफी सजग हैं। उन्होने स्पष्ट किया कि जो भी हमारी इन शर्तों को मानेगा उसी से हमारा गठबंधन होगा।

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