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मैनपुरी फतह : चाचा ने दिया आशीर्वाद, तो बहू ने रचा इतिहास

By Shakti Prakash Shrivastva on December 8, 2022
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मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में मिली सपा प्रत्याशी डिम्पल यादव की रिकार्ड जीत ने यह प्रमाणित कर दिया है कि यह जीत क्षेत्र में नेताजी मुलायम सिंह यादव के प्रति मतदाताओं की सहानुभूति और चाचा शिवपाल यादव की पार्टी में घर वापसी से उपजी कार्यकर्ताओं के उत्साह का परिणाम है। जिस तरह से जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में डिम्पल यादव को वोट मिला है उससे यह साफ हो गया है कि चाचा शिवपाल यादव ने अपने विधानसभा क्षेत्र में न केवल अपनी पकड़ मजबूत रखी है बल्कि डिम्पल यादव की जीत के लिए ईमानदारी से क्षेत्र में उन्होने प्रयास भी किया है।

प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद जब चाचा शिवपाल यादव ने अखिलेश से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए दूरी बनाई और यह घोषणा की कि अब वो अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी यानि प्रसपा के प्रसार पर ध्यान देंगे तो ऐसा लगने लगा था कि यादव कुनबा अब कभी एकजुट नही हो पाएगा। लेकिन समय चक्र ने ऐसा पहिया घुमाया कि नेताजी मुलायम सिंह यादव के निधन और बाद में मैनपुरी उपचुनाव ने कुनबे को एकजुट करने का एक अवसर ला खड़ा कर दिया। समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी घोषित होने के बाद डिम्पल ने एक शिष्ट और संस्कारित बहू की माफिक अधिकार जताते हुए चाचा शिवपाल से सहयोग करने की गुहार लगाई। शिवपाल ने भी बहू को सहयोग के लिए न केवल आश्वस्त किया बल्कि भविष्य में फिर कभी अखिलेश उनके साथ अन्याय करें तो साथ रहने का उससे आश्वासन भी मांगा। डिम्पल ने सहजतापूर्वक ससुर की शर्त पर हामी भारी। फिर क्या था चाचा शिवपाल पूरे उत्साह के साथ अपने समर्थकों के साथ भतीजे के सारे गिले-शिकवे भुलाते हुए चुनावी समर में कूद गए। राजनीतिक कलाबाजियों में माहिर शिवपाल ने अपने अनुभव से हर वो व्यवस्था क्षेत्र में की जो जीत के लिए आवश्यक होती है।

आज उसी का परिणाम है कि लोकसभा की पांचों विधानसभाओं में शिवपाल की विधानसभा जसवंतनगर से ही डिम्पल को सर्वाधिक वोटों की बढ़त मिली है जिसके नाते डिम्पल की रिकार्डतोड़ जीत संभव हुई है। डिम्पल ने मैनपुरी के इस उपचुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी रघुराज सिंह शाक्य को धूल चटाते हुए जिस तरह नेताजी मुलायम सिंह यादव के जीत का रिकार्ड तोड़ते हुए विजयी वरमाला अपने गले डाली है। वो महज एक लोकसभा क्षेत्र की जीत नही बल्कि सत्तासीन बीजेपी की सरकार के पतन की शुरुआत का एक संकेतक भी है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस ऐतिहासिक परिणाम ने सत्ता के मतान्ध बीजेपी नेताओं का भी बखूबी मानमर्दन किया है।

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