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यूपी में पोस्टरी सियासत !

By Shakti Prakash Shrivastva on November 10, 2024
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                                                                            शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

सियासत एक ऐसा क्षेत्र है जिसका कोई अपना निर्धारित दायरा नहीं है। इसमें सब कुछ जायज है बशर्ते परिणाम अनुकूल हो। उत्तर प्रदेश में हो रहे नौ विधानसभा के उपचुनाव इसके सबसे मौजू उदाहरण है। इस दौरान सियासी दलों द्वारा की जा रही सियासत देखने लायक है। यूँ तो चुनावों में सियासी दलों के आपस में सियासी बयानबाजी होती ही रहती है लेकिन इस बार इनमें भी एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यह ट्रेंड पोस्टर के रूप में दिख रहा है। इस नए सियासत में पार्टियां बयानबाजी के साथ-साथ पोस्टर के माध्यम से सियासत के दाँव चल रही हैं। बीजेपी, सपा, बीएसपी के बाद अब कांग्रेस भी इस सियासत में भागीदार हो गई है।

उत्तर प्रदेश के नौ विधानसभा सीटों के लिए जैसे ही उपचुनाव का ऐलान हुआ प्रदेश की सियासी पार्टियां हरकत में आ गईं। पहले बीजेपी फिर उसके जवाब में समाजवादी पार्टी फिर बीएसपी और अब कांग्रेस ने भी सियासी पोस्टर लगाकर उपचुनाव में इस पोस्टरी सियासत को चतुष्कोणीय बना डिया है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस पार्टी की प्रांतीय कार्यालय के सामने एक पोस्टर लगाया गया है। पार्टी के युवा नेता द्वारा लगाए गए इस पोस्टर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘कटेंगे तो बटेंगे’ वाले बयान को निशाने पर लिया गया है। पोस्टर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी और सपा मुखिया अखिलेश यादव की तस्वीर भी लगाई गई है।

पोस्टर में लिखा गया है कि, ‘बटोगे तो कटोगे’ का नारा देने वालों के मंसूबे तोड़ेंगे, ‘हम इंडिया गठबंधन के सिपाही यूपी में मोहब्बत की दुकान खोलेंगे’। यह पोस्टर कांग्रेस की युवा शाखा एनएसयूआई के नेता आर्यन मिश्र की तरफ से लगाया गया है। ऐसे में जबकि पूरे उपचुनाव में कांग्रेस चुनाव मैदान में नहीं है। मतलब कांग्रेस का एक भी प्रत्याशी मैदान में नहीं है। लेकिन कांग्रेस हाइकमान ने स्पष्ट तौर पर अपने को गठबंधन में बने रहने के ऐलान के साथ-साथ गठबंधन सहयोगी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को जिताने का संकल्प लिया है।

सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि बेशक कांग्रेस प्रदेश की मौजूदा सियासत में लगभग हाशिये पर है। लेकिन उसके इस कदम से विपक्षी गठबंधन आइएनडीआईए को प्रदेश में और मजबूती मिलने की संभावना बढ़ गई है। यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस के मतदाता अगर पार्टी की मनमुताबिक सहयोग करने का मन बना लिए तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि समाजवादी पार्टी की वोट बैंक में तो इजाफा होगा ही उसकी जीत की संभावनाएं भी अपेक्षाकृत बढ़ जाएंगी। प्रदेश में नौ विधानसभा सीटे ऐसी थी जिनके प्रतिनिधि मतलब विधायक बीते लोकसभा चुनाव में सांसद चुन लिए गए थे। ऐसे में उनकी रिक्त सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं। प्रदेश में मतदान 20 नवंबर को है। प्रदेश में कटहरी, मँझवा, सीसामऊ, फूलपुर, कुंदरकी, खैर, गाजियाबाद, करहल और मीरापुर ऐसे विधानसभा क्षेत्र है जहां ये चुनाव हो रहे हैं।

 

 

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