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माफिया मुख्तार पर गहराता संकट

By Shakti Prakash Shrivastva on January 20, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

जेल में बंद पूर्वाञ्चल के कुख्यात माफिया सरगना मुख्तार अंसारी की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। खासकर योगी आदित्यनाथ की सरकार में बाहुबली मुख्तार पूरी तरह बेबस और लाचार साबित हो रहे हैं। ऐसा देखा जा रहा है कि यदि कभी किसी अदालत से उन्हें कोई रिलीफ़ मिल भी जा रही है तो दूसरी अदालत से वह निरस्त हो जा रही है। चूंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की कमान संभालते ही अपराध सहित माफियाओं-बाहुबलियों पर अंकुश लगाने का जो सिलसिला शुरू किया वो आज उनके दूसरे कार्यकाल में भी बदस्तूर जारी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधीनस्थ विशेष कोर्ट गाजीपुर की एमपीएमएलए कोर्ट की तरफ से 15 मार्च, 2022 को जिला जेल बांदा के वरिष्ठ जेल अधीक्षक को जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को सुपीरियर क्लास में रखे जाने का आदेश दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने अधीनस्थ अदालत के इस आदेश को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि उसका आदेश उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर का है। माफिया सरगना अंसारी, कानूनन जेल में सुपीरियर क्लास पाने का हकदार नहीं है।

इस बाबत आदेश न्यायमूर्ति डीके सिंह ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका में गाजीपुर के विशेष एमपीएमएलए अदालत के अंसारी को जेल में सुपीरियर क्लास देने के आदेश की वैधता को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार की मुताबिक उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल 2022 के अनुसार अदालत को केवल सुपीरियर क्लास देने की संस्तुति करने का अधिकार है। उसे मानने या अस्वीकार करने का अंतिम अधिकार राज्य सरकार को है। जेल मैनुअल के तहत यह सुविधा देते समय विचाराधीन कैदी की शिक्षा, उसका आचरण, आपराधिक घटना की प्रकृति, आपराधिक मंशा देखी जाएगी। अंसारी का लंबा आपराधिक इतिहास है। मुख्तार पर 58 आपराधिक केस दर्ज हैं। गिरोह का सरगना है, अपराध गंभीर प्रकृति के हैं। अतः ऐसे में दुर्दांत अपराधी को सुपीरियर क्लास नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने माना कि अधीनस्थ अदालत ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सुपीरियर क्लास देने का निर्देश दिया है। ऐसा आदेश देने का अदालत को अधिकार ही नहीं है। अंसारी की तरफ से कानूनी पहलू पर विवाद नहीं किया गया और माना गया कि यह अधिकार राज्य सरकार को है। इस पर कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया।

 

 

 

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