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संजय के ‘प्रेशर पालिटिक्स’का नया दाँव !

By Shakti Prakash Shrivastva on September 19, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                               उत्तर प्रदेश के मऊ जिले स्थित घोसी विधानसभा के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी को मिली हार ने कई सियासी समीकरण तो बदले ही कई नेताओं के हाथ आए सियासी तोते भी उड़ा दिए। यहाँ सियासी तोते का अर्थ उस सियासी मौके से  है जो संबंधित नेताओं का महत्व बढ़ाने वाला था लेकिन यहाँ की पराजय के नाते उसके मिलने की संभावना कम हो गई है। ऐसे ही एक नेता है डॉ संजय निषाद जो निर्धन इंडियन शोषित हमारा आम दल यानि निषाद पार्टी के मुखिया हैं। यह पार्टी उत्तर प्रदेश में सत्तासीन बीजेपी सरकार में इन दिनों सहयोगी है और डॉ संजय सरकार में मत्स्य विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं। घोसी चुनाव घोषणा के पहले तक डॉ संजय, प्रदेश और प्रदेश के बाहर के उन लोकसभा क्षेत्रों का जमीनी आंकड़ा जुटाने में गंभीरता से लगे हुए थे जहां उनके जाति विशेष की आबादी अधिक है। उनका मानना था कि लगभग तीन दर्जन से अधिक सीटें ऐसी हैं जहां पर दलित मतदाताओं की आबादी चुनाव परिणाम प्रभावित करने की स्थिति में है। इन स्थानों से डॉ संजय अपनी पार्टी की दावेदारी करने की तैयारी में थे। अभी वो अपनी इस मंशा को अवसर देख गठबंधन के फोरम पर रखने ही वाले थे कि घोसी उपचुनाव की दुदुंभी बज गई।

इसके बाद बीजेपी पार्टी के भारी-भरकम अमले के साथ-साथ डॉ संजय निषाद, ओम प्रकाश राजभर और बीजेपी प्रत्याशी दारा सिंह चौहान सरीखे जाति आधारित राजनीति करने वाले नेताओं को अहम भूमिका में उतार दिया गया। इनके ऊपर इलाके में प्रभावी जिम्मेदारी इसलिए मानी गई क्योंकि इस क्षेत्र विशेष में इनके समाज की भूमिका काफी अहम है। इन सभी को जमीनी जातीय आंकड़ों के नाते ऐसे लगा कि यह चुनाव वो बहुत आसानी से जीत जाएंगे। लेकिन हुआ इसके विपरीत। घोसी उपचुनाव में सपा उम्मीदवार सुधाकर सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार दारा सिंह चौहान को लगभग 43 हजार मतों से हरा दिया। निर्णय आते ही बीजेपी को अपनी गलती का एहसास हो गया और उसने लोकसभा चुनाव को देखते हुए तत्काल अपनी रणनीति में बदलाव करने की शुरुआत कर दिया। इससे डॉ संजय निषाद सरीखे जीत की उम्मीद लगाए सुभासपा सुप्रीमो ओम प्रकाश राजभर जैसे नेताओं को तो दिन में तारे नजर आने लगे।

हालांकि चुनाव में हार से उपजे हालात का आकलन करते हुए डॉ संजय निषाद ने भी परिणाम के बाद अपना पैंतरा बदला। बीजेपी प्रांतीय इकाई से हार की बाबत अपना समीकरण समझाने की बजाय उन्होने दिल्ली स्थित बीजेपी आलाकमान के सामने पक्ष रखने का निर्णय लिया। इस बाबत सोमवार को वो दिल्ली पहुँच गए। वहाँ उन्होने बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच ये मुलाकात दिल्ली स्थिति बीजेपी के राष्ट्रीय मुख्यालय में हुई। सूत्रों से मिली जानकारी पर यकीन करे तो दोनों नेताओं के बीच लोकसभा चुनाव के साथ-साथ उन मुद्दों पर भी चर्चा हुई जिन पर डॉ संजय प्रांतीय इकाई से बात करने में अपने को असहज महसूस कर रहे हैं। इस बाबत नेताओं के बीच आने वाले अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर भी चर्चा हुई। संजय निषाद ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी के साथ चुनाव में सहयोग करने की चर्चा के साथ-साथ कुछ सीटों पर चुनाव लड़ने की बात भी रखी। घोसी हार के बाद संजय निषाद का पहला दिल्ली दौरा होने की वजह से कई मायनों में यह दौरा और वहाँ बीजेपी नेताओं से इनकी मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। सियासी जानकार इस पूरे दौरे को डॉ संजय के प्रेशर पालिटिक्स का हिस्सा करार दे रहे हैं।

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