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भारत जोड़ो यात्रा में दिखा खडगे का मतलब

By Shakti Prakash Shrivastva on January 4, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

कांग्रेस युवराज राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जब उत्तर प्रदेश पहुंची तो पार्टी को एहसास हुआ कि इस यात्रा का सबसे बड़ा फायदा उसे क्या हुआ। राहुल गांधी की यह यात्रा अपने नौ दिनों के विश्राम के बाद तीन जनवरी को जब प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी बार्डर पहुंची तो बड़ी संख्या में प्रदेश भर से आए कांग्रेसियों ने राहुल गांधी का स्वागत किया। स्वागत करने वाले कांग्रेसियों के अलावा इस मौके पर बड़ी संख्या में दलित समुदाय के लोग भी मौजूद रहे। इन लोगों की हाथों में अंबेडकर और कांशीराम के तस्वीर लगे झंडे और पोस्टर लहरा रहे थे। हजारों की संख्या में आए दलित युवाओं ने अंबेडकर और कांशीराम के साथ-साथ राहुल गांधी और कांग्रेस जिंदाबाद के नारे लगाए। उनका यह जयघोष भले ही तात्कालिक एक नेता के स्वागत के तौर पर लोगों ने देखा लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ समझने वाले लोगों ने इसे बखूबी समझा। राजनीति के जानकारों ने इसे कांग्रेस के कभी हार्डकोर मतदाता रहे दलितों के घर वापसी के संकेत के तौर पर देखा। सियासी नब्ज की पहचान रखने वाले इसे मल्लिकार्जुन खडगे को कांग्रेस पार्टी का  राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के सियासी परिणाम के रूप में मान रहे हैं। उनका मानना है कि यह कांग्रेस पार्टी के लिए शुभ संकेत हैं। क्योंकि उत्तर प्रदेश के संदर्भ में अगर बात करें तो कांग्रेस का यह दलित मतदाता पिछले दशकों में कांग्रेस से छिटककर बहुजन समाज पार्टी यानि बीएसपी के पास पहुँच गया था। लेकिन मायावती के सियासी मजबूरी या नीति की वजह से पिछले एक दशक से अब वही मतदाता नयी ठौर की तलाश में था। जिसे कांग्रेस के रूप में अब एक ठिकाना मिलता दिख रहा है लिहाजा वो कांग्रेस की तरफ दुबारा वापस आ रहा है।

जब मल्लिकार्जुन खडगे को एक चुनाव प्रक्रिया के माध्यम कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया था। तब खडगे के दलित समुदाय का होने के कारण इसे कांग्रेस का एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना गया था और यह कयास लगाया गया था कि इनके पार्टी अध्यक्ष बन जाने से दलित मतदाताओं के बीच पार्टी मजबूत हो सकती है। लेकिन किसी को इस बात का भान नही था कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ही उसका असर दिखने लग जाएगा। हालांकि कांग्रेस ने जिस तरह हिमाचल प्रदेश का विधानसभा चुनाव जीता और दिल्ली नगर निगम चुनावों में मजबूत हुई। उसको भी कहीं न कहीं पारंपरिक मतदाताओं के बीच कांग्रेस पार्टी की एक बार फिर बढ़ती लोकप्रियता से जोड़कर देखा गया।

भारत जोड़ो यात्रा में शामिल लोगों से जब मीडिया ने गाजियाबाद में बात की तो अधिकांश लोगों ने कहा कि देश में दलितों के उद्धार के लिए महात्मा गांधी, अंबेडकर और कांशीराम ने बहुत काम किया। जहां तक किसी पार्टी का सवाल है तो सिर्फ कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है जिसने दलितों के जीवन में बदलाव का प्रयास किया। इसका परिणाम आज सामने है।  लोगों ने माना कि पिछले कुछ समय से दलित मतदाताओं ने अपना रुख दूसरे क्षेत्रीय दलों की ओर कर लिया था इससे कांग्रेस कमजोर पड़ गई थी। लेकिन जिस तरह दलित मतदाताओं ने एक बार फिर कांग्रेस की ओर रुख किया है उससे पार्टी निःसन्देह पूर्व की तरह मजबूत हो सकती है। इस साल देश के दस राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसमें कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरीखे महत्वपूर्ण राज्य शामिल हैं। इन सभी राज्यों में दलित मतदाताओं की संख्या अधिक हैं। यदि कांग्रेस दलित मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने में कामयाब रहती है तो इन राज्यों के परिणाम पर इसका सीधा असर दिखेगा।

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