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बिहार विधानमंडल का सत्र 26 जुलाई से : लेकिन नहीं चुना जा सका विधान परिषद में कांग्रेस का नेता

By Shakti Prakash Shrivastva on July 21, 2021
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पटना, (संवाददाता)। कांग्रेस जैसी एतिहासिक विरासत वाली पार्टी मे संगठन स्तर पर अव्यवस्था का आलम है। विधानसभा चुनाव के बाद विधानसभा में तो पार्टी ने अपना नेता चुन लिया लेकिन विधान परिषद जैसे उच्च सदन में अभी तक पार्टी की तरफ से किसी नेता का नाम फाइनल नहीं किया जा सका है। विधान  परिषद में कांग्रेस दल के नेता का कार्यकाल 6 मई 2000 को ही पूरा हो गया। लेकिन अगंभीर व्यवस्था की वजह से अभी तक 14 महीने बाद तक नेता नहीं चुना जा सका है। 26 जुलाई से मानसून सत्र शुरू होने वाला है। माना जा रहा है कि बजट सत्र की तरह ही पार्टी बिना वियन परिषद में नेता बनाए ही मानसून सत्र में हिस्सा लेगी।

बिहार में विधान सभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने विधायक अजीत शर्मा को विधानसभा में पार्टी का नेता चुना था लेकिन इतना समय बीतने के बाद भी अभी विधानमंडल के उच्च सदन यानि विधान परिषद में पार्टी अपना नेता नहीं चुन सकी है। पार्टी ने पूरा बजट सत्र बिना बिना नेता के विधान परिषद में बिता दिया। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा का मानना है कि विधान परिषद में पार्टी का नेता चयन का मामला पार्टी आलाकमान को तय करना है। बिहार विधान परिषद में मदन मोहन झा, प्रेमचंद मिश्रा और समीर सिंह सदस्य हैं। तीनों पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर हैं। मदन मोहन झा प्रदेश अध्यक्ष हैं, प्रेमचंद मिश्रा और समीर सिंह कार्यकारी अध्यक्ष हैं। चौथे सदस्य राजेश राम का MLC टर्म 17 जुलाई 2021 को पूरा हो चुका है लिहाजा अब यही तीन लोग रह गए हैं। किसी दल की ओर से नेता चुनना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि किस मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव लाना है, यह पार्टी का नेता ही तय करता है। पार्टी का नेता स्पष्ट नहीं रहने से विधान परिषद को भी दिक्कत होती है कि महत्वपूर्ण बैठक में किसको बुलाया जाए। सूत्र बताते हैं कि इस बार मानसून सत्र से पहले 23 तारीख को होने वाली बैठक में प्रेमचंद मिश्रा को बुलाया गया था जबकि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा हैं। पूर्व की बैठक में मदन मोहन झा को बुलाया गया था। नेता या पार्टी का सचेतक ही व्हीप जारी करता है। कांग्रेस पार्टी छोड़ सभी पार्टियों ने अपने-अपने नेता चुन लिया है। बजट सत्र के दौरान BJP ने अपना नेता नवल यादव को चुना। JDU की तरफ से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उच्च सदन में नेता हैं। मुख्यमंत्री होने के नाते नीतीश कुमार दोनों सदन के नेता है। यह भी इसलिए है कि वे उच्च सदन के सदस्य हैं। अगर नीतीश कुमार विधान परिषद के नेता नहीं रहते और विधायक रहते तो वे सिर्फ निम्न सदन के ही नेता रहते। RJD की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी नेता हैं। CPI के दो सदस्य हैं और उसकी ओर से केदार पांडेय नेता हैं। विकासशील इंसान पार्टी के एक सदस्य मुकेश साहनी हैं और वही पार्टी के नेता भी है। माना जा रहा है कि पार्टी संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव होने है। इसी वजह से संभवतः यह चुनाव नहीं हो रहा है। चर्चा है कि कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष सहित कार्यकारी अध्यक्ष को भी बदला जाना है। इसको लेकर राहुल गांधी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित विधायकों, पार्षदों से वन-टून-वन बात की थी। इस बार बदलाव से पहले सामाजिक समीकरण का ख्याल रखने की मांग पार्टी के अंदर के वरिष्ठ नेता जोर-शोर से कर रहे हैं। खास तौर से अति पिछड़ी जाति, पिछड़ी जाति और महिलाओं की हिस्सेदारी देने की मांग पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा सार्वजनिक मंच के साथ ही व्यक्तिगत रुप से भी राहुल गांधी के समक्ष कर भी चुके हैं।

 

 

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