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संकट में एनडीए !

By Shakti Prakash Shrivastva on September 8, 2025
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                                                                                   शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियाँ अपने चरम पर हैं। पार्टियां यात्राएं, रैलियाँ, जनसभाये आदि के जरिए मतदाताओं के सामने अपने को दूसरों से बेहतर बताने की कवायद में लगी हुई है। पार्टी के भीतर टिकट वितरण का भी दौर शुरू हो गया है कि कौन लड़ेगा और कहाँ से लड़ेगा। जो गठबंधन में लड़ने वाले दल है वहाँ सीटों को लेकर हिस्सेदारी का खाका तय हो रहा है। प्रमुख सियासी गठबंधनों में एक, सतारूढ़ गठबंधन एनडीए में इसी बात पर घमासान मचा हुआ है। खासकर बीजेपी, जेडीयू और लोजपा रामविलास के बीच में पेंच फंसा है। जेडीयू इस बार बड़े भाई की भूमिका में रहना चाहती है। जबकि लोजपा के बढ़ते प्रभाव और उसकी मांग को लेकर बंटवारे में अड़चन आ रही है।

इस बार एनडीए गठबंधन में बीजेपी, जेडीयू और लोजपा रामविलास मुख्य घटक है। इनमें लोजपा की मांग को लेकर बाकी दोनों पार्टियों का हिसाब गड़बड़ हो रहा है। क्योंकि हर बार की तरह जेडीयू अधिक हिस्सेदारी चाह रहा है। सियासी गलियारे में जो जानकारी तैर रही है उस आधार पर जेडीयू बीजेपी से अधिक सीटें चाहता है। लेकिन अन्य पार्टियों की बढ़ती मांग और हिस्सेदारी को देखते हुए बीजेपी इस बार थोड़ा हीला हवाली कर रही है।

जेडीयू का तर्क है कि पिछला लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ा गया था। उस समय बीजेपी ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था जबकि जेडीयू 16 सीटों पर। इस बार का विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर लड़ा जा रहा है। लिहाजा उसी अनुपात में जेडीयू अधिक सीट की मांग कर रही है। इस बाबत जेडीयू का मानना है कि ऐसा करने से मतदाताओं में नीतीश के नेतृत्व और एनडीए के भीतर समन्वय, दोनों के बारे में अच्छा संदेश जाएगा। लेकिन इसमें पेंच फंस रहा है लोजपा रामविलास की वजह से। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की मांग है कि उसे 40 सीटें दी जाएं। उसका यह दावा पाँच सांसदों की वजह से है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि बीजेपी और जेडीयू उसके मांग के आधे से अधिक सीटें देने के मूड में नहीं हैं।

मिल रही जानकारी की मुताबिक बीजेपी और जेडीयू में 100 और 105 सीटों पर सहमति बन गई है। लेकिन इस सहमति पर अंतिम मुहर के लिए अभी इंतजार है। माना जा रहा है कि इस पर अंतिम चर्चा तभी होगी जब उपराष्ट्रपति के चुनाव में मतदान के संबंध मे सभी घटक दल के सांसद दिल्ली आएंगे। मतदान से संबंधित प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए सभी सांसद 9 सितंबर को दिल्ली में रहेंगे।

गतबंधन के दलों में सीट बंटवारे में मुख्य तीन दलों के अलावा उपेन्द्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मंच और जीतन राम मांझी के हिंदुस्तान अवाम मोर्चा जैसे अन्य सहयोगियों को भी शामिल किया जाएगा। फिलहाल गठबंधन पर संकट है और निदान की अंतिम तस्वीर नही आई है।

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