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यूपी में ‘हलाल’ पर रोक क्यों !

By Shakti Prakash Shrivastva on November 20, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                  जैसे ही पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार ने हलाल का प्रमाणपत्र जारी करने वाले कारोबारियों पर लगाम लगाते हुए उन पर प्रतिबंध लगाया। पूरे प्रदेश ही नहीं देशभर में इस बात की चर्चा होने लगी कि आखिर सरकार ने ऐसा क्यों किया। लेकिन इस बात को समझने के लिए पहले इसके अर्थ को समझना होगा की हलाल है क्या। हलाल मूलतः एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ होता है वैध जबकि एक दूसरा शब्द है हराम जिसका मतलब होता है अवैध। इसके अलावा इसकी एक परिभाषा धर्म आधारित भी है। जैसे इस्लाम धर्म जिन कार्यों को करने की इजाजत या मान्यता देता है वो हलाल की श्रेणी में माना जाता है और जिसे नहीं देता है उसे हराम माना जाता हैं। लेकिन अपने देश में इसको प्रमाणित करने वाली कोई अधिकृत संस्था नहीं है जो किसी चीज को हलाल के रूप में प्रमाणित करे। लेकिन अनधिकृत या ये कहे कि देश में नाजायज तरीके से कुछ संस्थाएं इसका प्रमाणपत्र देने का काम कर रही है। जब यूपी सरकार के संज्ञान में ये बात आई तो उसने सख्ती करते हुए कारोबार का शक्ल ले चुके इस काम पर रोक लगा दी।

सरकार के आदेश के तहत अब उत्‍तर प्रदेश में बिना किसी अधिकार के खान-पान और ब्यूटी प्रोडक्‍ट्स पर अवैध तरीके से हलाल सर्टिफिकेट देने के कारोबार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग गया है। इसके साथ ही अब प्रदेश  में हलाल सर्टिफाइड प्रॉडक्टस का निर्माण, बिक्री और भंडारण अवैध हो गया है। ऐसा करने वाले फर्म या व्यक्ति के खिलाफ औषधि और प्रसाधन सामग्री कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस तरह से हलाल प्रमाणपत्र देने के नाम पर जुटाए जा रहे धन से आतंकवादी संगठनों और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। चूंकि भारत से बड़ी मात्रा में खाद्य उत्पादों का निर्यात सिंगापुर, मलेशिया, खाड़ी देशों समेत कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होता है। वहां अधिकांशतः इस्लामिक आबादी होने की वजह से अधिकतर कंपनियां अपने उत्पाद के लिए ‘हलाल सर्टिफिकेशन’ करवाती हैं। क्योंकि उससे वहाँ के लोग यह भरोसा कर लेते है कि यह उत्पाद इस्लाम के लिहाज से हलाल की श्रेणी वाला है और वो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यूपी की खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की प्रमुख सचिव अनीता सिंह की मुताबिक हलाल प्रमाण पत्र देने के लिए पूरे देश में अब तक कोई भी संस्था रजिस्टर्ड नहीं है। पहले हलाल का इस्तेमाल मीट के लिए हुआ करता था। हलाल का मतलब धर्म विशेष के हिसाब से शुद्ध होता है। लेकिन पिछले दिनों इसका प्रयोग सौंदर्य प्रसाधन, चीनी, पिपरमिंट तेल, खाद्य तेलों, रवा और बेकरी उत्पादों पर भी होने लगा है। कुछ देशों में हलाला की बाध्यता के कारण निर्यात के लिए तो इसे ठीक माना जा सकता है। लेकिन देश में ऐसे प्रमाण पत्र का प्रयोग अवैध है।

यह बात चौंकाने वाली है कि देश में हलाल प्रमाणपत्र देने के लिए कोई संस्था अधिकृत नहीं है लेकिन चेन्नई की एक कंपनी हलाल इंडिया, दिल्ली की जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट और मुंबई की हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी संस्थाएं धड़ल्ले से हलाल सर्टिफिकेट जारी करती हैं। बाहर के देश उसे मानते भी हैं।
लेकिन इस तरह के कारोबार का मामला तब सुर्खियों में आया जब लखनऊ के हजरतगंज थाने में हलाल सर्टिफिकेट देने वाली संस्थाओं के खिलाफ ऐशबाग निवासी शैलेंद्र कुमार शर्मा ने प्राथमीकी दर्ज कराई। उनका आरोप है कि ये संस्थाएं लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। बिना किसी अधिकार के ये हलाल प्रमाण पत्र जारी कर अनुचित लाभ कमा रही हैं। इस धन का इस्तेमाल राष्ट्र विरोधी तत्वों और आतंकी संगठनों की फंडिग के लिए किया जा रहा है। कल तक जो भी हो रहा हो लेकिन अब ऐसे कारोबार पर प्रदेश में पूरी तरह रोक लग चुकी है और जो लोग भी कारोबार करते मिलेंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

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