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क्यों पीछे हटे ‘योगी’?

By Shakti Prakash Shrivastva on December 11, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

आखिर क्या वजह हुई कि राजस्थान विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ही मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे चल रहे नाथ संप्रदाय के योगी बालकनाथ अचानक बैकफुट पर आ गए। शनिवार को अचानक योगी बालकनाथ ने खुद बयान देते हुए अपने को मुख्यमंत्री की दौड़ से किनारे कर लिया। उन्होने कहा कि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता ने पहली बार सांसद और विधायक बनाकर देश की सेवा करने का अवसर दिया है। उन्होने लोगों से मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को नजर अंदाज करने की अपील भी कर दी। उन्होने यह भी कहा कि मुझे अभी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में और अनुभव प्राप्त करना है। इसके बाद सवाल यह उठना लाजिमी है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। इसके पीछे जो कुछ महत्वपूर्ण कारण समझ मे आया उसमें योगी बालकनाथ का ओबीसी होना, योगी होना और अनुभव की कमी जैसे कारण महत्वपूर्ण हैं।

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के पहले से ही मुख्यमंत्री पद की दौड़ में योगी बालकनाथ शामिल थे। पार्टी ने चुनाव के दौरान कराये गए आंतरिक सर्वे में भी बालकनाथ की ही दावेदारी को मजबूत बताया गया था। चुनाव में मिले प्रचंड जीत के बाद उनकी दावेदारी और मजबूत हो गई। मेनस्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक सभी जगह बालकनाथ को मुख्यमंत्री बनाने वाली खबरें सुर्खियां बटोरने लगी। गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से बालकनाथ की मुलाकात होने के बाद से उनके मुख्यमंत्री बनने की चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया।  लेकिन योगी बालकनाथ ने ही अपने बयान से इन बातों को खारिज कर दिया। ऐसे में जब सियासी जानकारों से इस बाबत बात की गई तो पता चला कि योगी बालकनाथ चूंकि ओबीसी वर्ग से है और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री पद के मुख्य दावेदार शिवराज सिंह चौहान और प्रह्लाद सिंह पटेल भी इसी तबके से आते हैं। लिहाजा पार्टी ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर इस को नकार दिया। बालकनाथ के बारे मे यह तो सच है कि उनकी सियासी उम्र कम होने के नाते उनमें सियासी अनुभव की कमी है। क्योंकि इनकी सियासी उम्र कुल लगभग पाँच साल की है। एक बार सांसद और अब पहली बार विधायक बने हैं। उन्होने अपने बयान में भी इस सच्चाई को स्वीकारा है। इसके अलावा बालकनाथ का नाथ संप्रदाय का योगी होना भी कहीं न कहीं उनके लिए बड़ी बाधा बन गयी। क्योंकि बीजेपी शासित एक राज्य उत्तर प्रदेश में पहले से ही नाथ संप्रदाय के योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री है। ऐसे में पार्टी ने दो राज्यों में एक संप्रदाय के योगी को मुख्यमंत्री बनाने से परहेज रखा। बेशक पार्टी हिंदुत्व कार्ड की पोषक है लेकिन अब वो सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास की बात करने लगी है। ऐसे में यदि पार्टी बालकनाथ को मुख्यमंत्री बनाती है तो उसपर योगी सियासत को प्रोत्साहित करने और कट्टर हिन्दुत्व की सियासत करने का फिर से ठप्पा लग सकता है। सियासत से जुड़े कुछ जानकार हालांकि इसे हाईकमान की स्ट्रेटजी से जोड़कर भी देख रहे है।

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