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PM का जन्मदिन आज : देशवासियों का विश्वास ‘मोदी हैं तो मुमकिन है’!

By Shakti Prakash Shrivastva on September 17, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बेशक ‘मोदी हैं तो मुमकिन है’ एक चुनावी नारा था जिसे भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के दौरान दिया था। लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी (PM NARENDRA MODI) के 2014 से लेकर आज 2022 तक के कालखंड का विश्लेषण करें तो ऐसा लगता है कि आज यह पंक्तियाँ देशवासियों की आस्था और विश्वास का प्रतीक बन गया है।

जब भी जिस भी मुद्दे पर मोदी (PM NARENDRA MODI)‘मन की बात’ करते हैं तो करोड़ों-करोड़ की संख्या में लोग उन्हें गौर से सुनते है। उनके आह्वान पर बैंकों के सामने जहां लोग लाइन में खड़े हो जाते है वहीं कोरोना काल में घर के दरवाजे पर न केवल दीया जलाते हैं बल्कि घंटा और शंख भी बजाने लगते हैं।

किसी भी तरह के राजनीतिक, सामाजिक या व्यापारिक दुराग्रहों से अलग होकर कभी इत्मीनान से ऐसे व्यक्तित्व के बारे में सोचिए कि ऐसा क्यों हो रहा है। तो आपको यह लगेगा कि ऐसा आह्वानकर्ता कोई साधारण नहीं हो सकता। वरना विविधताओं से भरे इस देश में जहां आज हर व्यक्ति तार्किक है बिना तर्क-वितर्क किसी निर्णय पर हामी नहीं भरता है वहाँ करोड़ों-करोड़ की संख्या में कोई किसी का फालोवर कैसे हो सकता है। राजनीतिक प्रतिपक्षी इसे अंधभक्ति कहते हैं। जो भी हो लेकिन यह सत्य है कि निःसंदेह यह सामान्य तो नहीं ही है। आप इस बात पर गंभीरता से मनन करिए कि गाँव का एक सामान्य ग्रामीण भी सरकार द्वारा दिए गए योजनाओं को या सरकार के अच्छे-बुरे निर्णयों को भी आज बड़े इत्मीनान से इस भाव के साथ स्वीकार करते हुए मिल जाएगा कि मोदी जी (PM NARENDRA MODI) ने किया है तो ठीक ही किया होगा। लोकतंत्र की सबसे छोटी और मजबूत इकाई मतदाता के रूप में उस ग्रामीण का यह विश्वास अपने प्रधानसेवक यानि प्रधानमंत्री मोदी (PM NARENDRA MODI) को न केवल अजेय होने का एहसास कराता है बल्कि उन्हें अकाट्य और अमोघ भी बनाता है। इस विश्वास के आगे विश्व के बड़े-बड़े प्रतिमान भी मायने नहीं रखते हैं।

इस विश्वास का ही प्रतिफल है कि आज गांवों-गांवों के छोटे-छोटे बच्चों सहित बुजुर्गों, महिलाओं, गरीबों, बेसहारों को मोदी (PM NARENDRA MODI) पर एक अभिभावक के रूप में अटूट भरोसा है। शहरों में तो नहीं लेकिन गांवों में सामान्य हाल-चाल के आदान-प्रदान में भी मोदी (PM NARENDRA MODI) का जिक्र लाजिमी सा हो गया है। क्या हाल है पूछने पर अमूमन यही जवाब सुनने को मिलता है कि मोदी जी (PM NARENDRA MODI) ने घर दे दिया, शौचालय दे दिया, गैस दे दिया साथ ही राशन दे रहे हैं… और क्या चाहिए। भैया भगवान उनको स्वस्थ रखें। सच मानिए ऐसी दुआएं किसी के लिए अकारण नहीं निकलतीं। सरकारें और मंत्री-प्रधानमंत्री पहले भी थे लेकिन सात दशकों में किसी व्यक्ति विशेष के लिए ऐसा विश्वास पहले कभी नहीं देखा गया। इस बात का अतीत गवाह है। योजनाएं भी सरकारी, पहले से ही है लेकिन रोटी का इंतजाम, महिलाओं की इज्जत और सहूलियत संबंधी जो योजनाएं मोदी (PM NARENDRA MODI) सरकार ने दिया उसके ये ग्रामीण कायल हैं।

आज भी यह देश भावनाओं को महत्व देने वाला है। यही वजह है कि यहाँ भ्रष्टाचार के मामले में यथार्थ कुछ भी हो लेकिन आम जनता को इस बात का यकीन है कि मोदी (PM NARENDRA MODI) भ्रष्टाचारी नहीं हैं। क्योंकि उनको लगता है कि उनके आगे-पीछे कोई नहीं है तो वो किसके लिए चोरी करेंगे। जो मोदी (PM NARENDRA MODI) अपने परिवार वालों को अपने पद के प्रभाव के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देते वो दूसरों को क्यों करने देंगे। लोकतान्त्रिक देश में किसी जनप्रतिनिधि के लिए आम बहुसंख्यक मतदाताओं का यह विश्वास उसकी राजनीतिक पारी को दीर्घजीवी करती है।

आज प्रधानमंत्री मोदी (PM NARENDRA MODI) का जन्मदिन है। इस मौके पर हम सभी की शुभकामनाएं हैं कि न केवल उनका राजनीतिक जीवन दीर्घकालिक हो बल्कि व्यक्तिगत जीवन भी दीर्घजीवी हो। और आम देशवासियों पर ‘मोदी हैं तो मुमकिन है’ का विश्वास यूं ही कायम रहे।

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