Responsive Menu
Add more content here...
August 9, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

अतीक के सपोर्टर भी निशाने पर !

By Shakti Prakash Shrivastva on April 13, 2023
0 572 Views

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

             बुधवार की सुबह जब पूरा देश पंजाब के भटिंडा मिलिट्री स्टेशन में हुई फायरिंग में चार जवानों की मौत का विश्लेषण कर रहा था प्रयागराज में प्रवर्तन निदेशालय की टीम माफिया अतीक अहमद के सपोर्टरों के यहाँ छापे डाल रही थी। अतीक का जरायमी किला कैसे ज़मींदोज़ होगा इसके लिए बकायदे सरकार लगी हुई है। अब सरकार उसके आर्थिक साम्राज्य को भी नेस्तनाबूंद करने पर आमादा है। इसी क्रम में अतीक के सपोर्टरों के यहाँ दबिश डाली जाने लगी है। खासकर उनके यहाँ जिनसे अतीक को आर्थिक आक्सीजन मिलता था। अतीक के वकील समेत दर्जनभर लोगों के यहाँ की गई छापेमारी में भारी मात्रा में नगदी के अलावा नोट गिनने की दर्जनों मशीनों के मिलने से ईडी के अधिकारी भी चकित हैं। जांच अधिकारियों की पूछताछ में नकदी के स्रोत के बारे संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने पर इसे और नोट गिनने की मशीनों को भी कब्जे में ले लिया गया है।
साथ ही प्रवर्तन निदेशालय की लगभग डेढ़ दर्जन टीमों ने अल सुबह ही अलग-अलग ठिकानों पर धावा बोल दिया। नींद खुलते ही दरवाजे पर ईडी टीम व सीआरपीएफ जवानों को देख माफिया के करीबी व उनके परिजन भौचक रह गए। हाल यह रहा कि उन्हें कुछ सोचने का भी मौका नहीं मिला। जब तक वह कुछ समझते इससे पहले ही ईडी टीम ने उनके घरों व प्रतिष्ठानों को कब्जे में ले लिया।
दरअसल कार्रवाई करने वाले दल में छः दर्जन  के आसपास सदस्यों के होने की बात सामने आई है। छापा मारने से पहले ही इन सदस्यों को 17 टीमों में बांट दिया गया था। फिर इन्हीं टीमों ने कार्रवाई की। परिजनों को भीतर कर प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए। साथ ही इनके भीतर व बाहर की ओर सीआरपीएफ के जवान तैनात हो गए। यह जवान ईडी अफसरों के साथ ही पहुंचे थे। ईडी की अलग-अलग टीमें अन्य लोगों के साथ ही बिल्डर संजीव अग्रवाल व कार शोरूम मालिक दीपक भार्गव के घरों व कार्यालयों में भी पहुंची थीं। बिल्डर के सिविल लाइंस स्थित घर में तलाशी के दौरान एक कमरे में नोटों के बंडल मिलने पर अफसर दंग रह गए। सीआरपीएफ जवानों को निर्देश था कि कार्रवाई के दौरान किसी को भीतर न आने दें। ना ही घर के अंदर मौजूद किसी शख्स को बाहर जाने दिया जाए। उनके मोबाइल फ़ोन भी जमा करा लिए गए थे। ताकि वह किसी से संपर्क न कर पाएं। ईडी की 17 टीमों ने सभी 15 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा तो इसकी भी एक वजह रही। सूत्रों का कहना है कि अलग-अलग कार्रवाई करने की स्थिति में जानकारी लीक होने की आशंका थी। ऐसे में कार्रवाई की जानकारी मिलने पर अतीक के करीबियों की घर से दस्तावेज हटाने या ताला बंद कर गायब होने की भी आशंका थी। यही वजह है कि एक साथ धावा बोला गया और रणनीति सफल भी रही। इस तरह शूटरों को पकड़ने में भले ही थोड़ा वक्त लगे लेकिन अतीक के आर्थिक ढांचे की कमर इस कार्रवाई से तो टूट ही जाएगी।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *