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October 9, 2026
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भाजपाई होते-होते रह गए शिवपाल!

By Shakti Prakash Shrivastva on September 12, 2025
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                                                                      शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य शिवपाल यादव कुछ वर्षों के लिए पार्टी छोड़कर अलग हो गए थे। परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बनी थीं कि उन्होंने अपनी एक पार्टी भी बना ली थी। उस दौरानं वो लगातार बीजेपी के संपर्क में भी थे। एक समय ऐसा भी था 2012 में कि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह सीधे उनसे जुड़े हुए थे। बीजेपी में लेने का प्रस्ताव भी था। इस बाबत उन्हे दिल्ली बुलाया भी गया था। लेकिन जो प्रस्ताव था वो उन्हे स्वीकार नहीं था लिहाजा वो गए नहीं। इस तरह शिवपाल यादव बीजेपी में शामिल नहीं हुए। परिस्थितियाँ बदली और वो वापस अपने पुराने पार्टी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। अपनी बनाई हुई पार्टी का अधिकृत तौर पर सपा में विलय भी कर दिया।

सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बने रहे शिवपाल यादव के इस मामले का एक बार फिर खुलासा शिवपाल यादव ने स्वयं ही एक चैनल के साथ बात करते हुए किया है। वो भी ऐसे समय में जब बीजेपी विधायक केतकी सिंह द्वारा सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को टोंटी चोरी कहे जाने वाले बयान पर सियासी तूफान मचा हुआ है। समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता आक्रोशित हैं। सपा सुप्रीमो अखिलेश स्वयं आगे बढ़कर इस पर मुखर है। बकौल शिवपाल यादव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2012 में सपा को बहुमत मिला और सरकार बनाने का मौका मिला। मुलायम सिंह यादव के स्वास्थ्य को देखते हुए चर्चा होने लगी कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। पार्टी का एक धड़ा शिवपाल यादव को मुख्यमंत्री बनाना चाहता था तो वहीं दूसरा धड़ा अखिलेश यादव को। इसी दौरान होली के मौके पर सैफई में मुलायम सिंह यादव का पूरा कुनबा जुटा था। एक कमरे में मुलायम सिंह यादव की मौजूदगी में शिवपाल यादव, प्रोफेसर राम गोपाल यादव और अखिलेश यादव इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे। अपनी तरफ से सुझाव देते हुए शिवपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव से कहा कि आप मुख्यमंत्री बन जाइए और एक साल बाद अपनी जगह अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बना दीजिएगा। लेकिन यहाँ शिवपाल के सुझाव को अनसुना कर दिया गया। रामगोपाल और अखिलेश यादव ने मिलकर सुनियोजित तरीके से ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि मुलायम को न चाहते हुए भी अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री चेहरा बनाने के लिए सहमति देनी पड़ी। इस तरह 38 वर्षीय अखिलेश यादव यूपी के सबसे युवा मुख्यमंत्री बन गए।

ऐसे में नाराज हो कुनबे से अलग शिवपाल यादव बीजेपी और अमित शाह के सीधे संपर्क में आ गए। शिवपाल की मुताबिक उन्हे बीजेपी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया जो उन्हे  रास नहीं आया। क्योंकि उन्होंने कहा कि मैं मंत्री रह चुका था, इसलिए मंत्री पद मुझे मंजूर नहीं था। हालांकि गृहमंत्री अमित शाह की तरफ से इस बाबत दिल्ली आने का बुलावा भी आया लेकिन चूंकि दिया गया आफ़र मेरे मनमाफिक नहीं था। लिहाजा मैंने ठुकरा दिया और दिल्ली गया भी नहीं। इस तरह शिवपाल यादव भाजपाई होते-होते बच गए।

शिवपाल ने 2018 में पार्टी से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) नाम से पार्टी बनाई थी। हालांकि, बाद में स्थितियाँ बदलने पर उन्होंने दिसंबर 2022 में अपनी पार्टी प्रसपा का सपा में विलय भी कर दिया था।

 

 

 

 

 

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