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कृषि होगा विकास का आधार!

By Shakti Prakash Shrivastva on September 8, 2025
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                                                                          शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

अपना देश एक कृषि प्रधान देश है। आज भी हमारी आबादी और आर्थिक ढांचे को बड़ा सहयोग गांवों से मिलता है। लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद के कुछ दशकों में ऐसा देखा गया कि गांवों से सरकारों का जुड़ाव अवसर विशेष के लिए होता गया। जबकि आने वाले दिनों में भले ही तस्वीर बदल जाए लेकिन आज भी सियासत में काबिज अधिकांश चेहरों का जुड़ाव कहीं न कहीं गाँव से है। हालांकि अरसे बाद मौजूदा केंद्र और राज्य की सरकारों ने फिर से गाँव की समृद्धि को ही वास्तविक समृद्धि मानते हुए गांवों की ओर रुख किया है। चाहे ग्रामीणों को पीने की शुद्ध जल मिले इसके लिए जलजीवन मिशन हो या स्वच्छता के लिए शौचालय और घर निर्माण से जुड़ी योजनाएं हो इन सबका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ ग्रामीण भारत को महत्व देने से है। उत्तर प्रदेश सरकार ने तो बाकायदा विकसित यूपी 2047 के संकल्प के लिए कृषि को मजबूत आधार बनाने का निर्णय लिया है। साथ ही इसके लिए ऐसी कार्ययोजना बनाने का फैसला भी किया है जो आने वाले बाईस वर्षों में न केवल प्रदेश को अलग पहचान देगी बल्कि कृषि उत्पादन में वैश्विक लीडर भी बनाएगी।

पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई मे विकसित भारत 2047 की मुहिम छिड़ी हुई है। इसका उद्देश्य है कि 2047 मे जब देश आजादी का सौवाँ वर्ष मना रहा होगा तब देश विकासशील से विकसित हो जाए। इस संदर्भ में एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह कहा कि कृषि और औद्योगिक विकास मिलकर यूपी को भारत के ग्रोथ इंजन में बदलेंगे। आने वाले समय में प्रदेश न केवल भारत के किसानों के लिए बल्कि वैश्विक कृषि जगत के लिए भी रोल माडल बनकर उभरेगा। उन्होंने सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि 2030 तक यूपी को देश में फसल उत्पादकता और कृषि निर्यात में नंबर एक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य यह भी है कि 2047 तक प्रदेश दुनिया के मक्षिकों, चीन, फ्रांस और अमेरिका जैसे अग्रणी देशों के बराबर में खड़ा होगा। प्रदेश रूस, आस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे कृषि निर्यातक देशों की श्रेणी में होगा।

इस लक्ष्य के लिए सरकार ने भंडारण और मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग इंफ्रा स्ट्रक्चर, मेगा फूड पार्क, कोल्ड चेन, कृषि शिक्षा, नवाचार और रिसर्च, ससटेनेबल एग्रीकल्चर, वैज्ञानिक तकनीकों का विस्तार और फसल विविधीकरण जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता पर रखते हुए कार्ययोजना बनाई है।

समीक्षा के दौरान यह भी पाया गया कि पहले प्रदेश का कृषि उत्पादन सीमित था, वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल  नगण्य था। यहाँ तक की किसानो को उनकी उपज का सही मूल्य तक नही मिल पता था। लेकिन अब स्थितियाँ बदली है। सरकार ने भी प्राथमिकताएँ बदली है। लिहाजा उम्मीद की जा सकती है कि आने वाला समय कृषि क्षेत्र के लिए बेहतर होगा।

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