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August 10, 2026
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चुनौतियों से घिरी है बिहार की नई सरकार

By Shakti Prakash Shrivastva on August 12, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बिहार की राजनीतिक नब्ज को बखूबी समझने वाले जेडीयू नेता नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार की राजनीति में नया समीकरण बनाते हुए आठवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं। इस बार उनका गठबंधन लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ है। हालांकि सीपीआई एमएल आदि दलों के लिए भी रास्ते खुले रखे गए हैं। इस सरकार में जहां जेडीयू नेता नीतीश मुख्यमंत्री बने है वही लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव को उप मुख्यमंत्री का पद मिला हैं। सरकार बन गई है। दोनों नेताओं ने पद और गोपनीयता की शपथ लेते ही 24 और 25 अगस्त को विधानसभा का दो दिवसीय सत्र बुलाने की भी घोषणा कर दी है। इस सत्र के दौरान सरकार अपने विश्वास मत प्राप्ति के साथ-साथ विधानसभाध्यक्ष के लिए अविश्वास मत का प्रस्ताव भी ला सकती है। चूंकि गठबंधन की कुल विधायक संख्या आवश्यकता से कहीं ज्यादा है लिहाजा सरकार की उम्र पर कोई संकट फिलहाल नही है। लेकिन इस सरकार के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती आती दिख रही है उसमें सबसे बड़ी चुनौती राजद नेता तेजस्वी यादव की तरफ से 2020 विधानसभा चुनाव के दौरान किये गए उनके वायदे हैं। इन वायदों में से कुछ को प्राथमिकता पर लेते हुए सरकार को अहम निर्णय लेने होंगे। जो सरकार की आर्थिक हालात देखते हुए बहुत आसान भी नहीं लगता है। जैसे तेजस्वी ने चुनाव के दौरान कहा था कि मेरी सरकार बनते ही मेरी कलम से बेरोजगारों को दस लाख नौकरियां दी जाएंगी। किसानों के कर्जे माफ होंगे। पेंशनधारियों की पेंशन राशि में इजाफा किया जाएगा साथ ही सरकारी विभागों में संविदा पर नौकरी की व्यवस्था खत्म की जाएगी आदि-आदि। चुनावी घोषणा पत्र में बाकायदा इसका उल्लेख है। उपमुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी के बाद मीडिया से मुखातिब राजद नेता तेजस्वी ने कहा कि हमने चुनाव के दौरान कहा था कि मुख्यमंत्री बनते ही मैं अपने वायदे पूरे करूंगा। लेकिन अभी मैं मुख्यमंत्री नही बल्कि उप मुख्यमंत्री हूँ। फिर भी हमारी सरकार में बेरोजगारों को बड़ी संख्या में नौकरियां मिलेंगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की सत्ता की लड़ाई में सीधे तौर पर एक दूसरे से टकराने वाले भी आपस में महज राजनीतिक स्वार्थ के एक साथ तो हो लिए है। लेकिन भविष्य की राजनीतिक गुणा-गणित और फायदे को देखते हुए नीतीश कितनी आसानी से विरोध करने वाले अपने चरित्र में बदलाव करते हुए गैर प्राथमिकता वाले विषयों को प्राथमिकता पर लेंगे इस पर जानकारों को संदेह है। अब देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार, तेजस्वी के घोषणा पत्र में किये गए घोषणाओं को अमली जामा कब और कैसे पहनाते है। हालांकि यह आने वाले वक्त के गर्भ में है लेकिन इतना तो तय है कि इस मामले में नीतीश की राह बहुत आसान नही है। जिसकी बानगी सरकार के शुरुआती दिनों में ही दिखने लगेंगे।

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