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आखिर मिट गया ‘खानदानी’ कुनबे का दाग!

By Shakti Prakash Shrivastva on March 30, 2024
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में 2017 में सरकार बनते ही प्रदेशभर के माफियाओं की नींद गायब हो गई। क्योंकि सख्त प्रशासक योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही इस बात का स्पष्ट ऐलान कर दिया था कि अब प्रदेश में गुंडाराज नहीं चलेगा। उन्होंने प्रदेशभर में अपराध पर जीरो टालरेंस की नीति लागू करने पर अमल करना शुरू कर दिया। संदेश दिया कि प्रदेश के माफिया या तो अपराध छोड दे या प्रदेश वरना.. । योगी आदित्यनाथ के इस हुंकार की गूंज समूचे प्रदेश में फैल गई। एक-एक कर नामचीन गैंगस्टर अपराधी अपराध से तौबा करते दिखने लगे। कुछ इनकाउंटर की भेंट चढ़े, कुछ जेल में है तो कुछ अपनी मौत मरे। धनंजय सिंह, विजय मिश्र सरीखे माफिया जेल में है, अतीक अहमद-अशरफ अहमद की हत्या हो गई, अतीक के बेटे समेत कुछ कुख्यात इनकाउंटर में ढेर हुए, बिकरू कांड का जिम्मेदार गाड़ी पलटने से मरा और कुख्यात बाहुबली मुख्तार अंसारी गुरुवार को हार्ट अटैक का शिकार हो गया। मुख्तार की मौत के बाद एक बार फिर इस बात की चर्चा शुरु हों गई है कि राष्ट्रवादी व उच्च संस्कार वाले खानदानी कुनबे में गैंगस्टर मुख्तार कैसे। हालांकि अब वो भी नहीं रहा।

मुख्तार अंसारी के पिता और माता दोनों ही पक्ष का अपने-अपने इलाके में खासा रसूख था।
मुख्तार अंसारी के ननिहाल की बात करें तो नाना और उनका परिवार एक प्रतिष्ठित परिवार था। मुख्तार अंसारी के नाना बिग्रेडियर उस्मान आर्मी में थे और उन्हें उनकी वीरता के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। बिग्रेडियर उस्मान ने 1947 की जंग में भारत को नवशेरा में जीत दिलाई थी। वो इस युद्ध में लड़ते हुए शहीद हो गए थे और उनकी शहादत के बाद ही उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी मुख्तार अंसारी के रिश्तेदार हैं।

मुख्तार अंसारी के दादा डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वे 1926-1927 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और फिर मुस्लिम लीग के अध्यक्ष भी रहे।
कहा जाता है कि डॉ. अंसारी महात्मा गांधी के काफी करीबी थे। वह गांधीवादी विचारधारा से जुड़े थे। जब देश का बंटवारा हुआ तो डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी के परिवार के कई सदस्य पाकिस्तान चले गए। डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी के बेटे सुब्हानउल्लाह अंसारी देश के बड़े वामपंथी नेता थे। सुब्हानउल्लाह के तीन बेटे हुए जिनमे से एक मुख्तार अंसारी भी था। मुख्तार के अलावा सिबकतुल्लाह अंसारी और अफजाल अंसारी दो अन्य बेटे थे। मुख्तार समेत उसके दोनों भाई और भाई के लड़के भी सियासत में है। लेकिन मुख्तार इस प्रतिष्ठित सियासी कुनबे पर दाग साबित हुआ। नब्बे के दशक में उसके ऊपर बाहुबली बनने का जो शौक लगा उसकी परिणिती 2005 से सजायाफ्ता हो जेल में रहने और अंततः मिली मौत से हुई। इस तरह से 1963 में गाजीपुर में जन्मे मुख्तार अंसारी की  28 मार्च की साँय हुए हार्ट अटैक से मौत ने इस खानदानी कुनबे के आपराधिक चिराग को हमेशा हमेशा के लिए बुझा दिया।

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