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महाकुंभ : युवाओं ने समझा रील और रियल लाइफ का महत्व!

By Shakti Prakash Shrivastva on March 9, 2025
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                                                                             शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

महाकुंभ का जो महात्म्य इस बार स्थापित हुआ उसमें केंद्र और राज्य की सरकारों के साथ-साथ सोशल मीडिया की पहुँच का भी बड़ा योगदान रहा। सरकारों द्वारा महाकुंभ के दिव्य और भव्य आयोजन की गूंज जब समाज के हर तबके तक पहुंची तो उसकी दिव्यता के सबसे ज्यादा मुरीद हुए युवा। यही वजह रहा कि महाकुंभ में पहुँचने वालों की सर्वाधिक संख्या युवा खासकर पचीस से पचास साल के उम्रवय के लोगों की रही। पहली बार देश के युवाओं को यहाँ की भव्यता ने सनातन के महत्व का एहसास कराया। उन्हे अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व की अनुभूति हुई। उन्हे यह भी एहसास हुआ कि रील लाइफ वाली आभासी जिंदगी से कहीं अधिक सुकून और सम्मान मुहैया कराने वाली ज़िंदगी है रीयल लाइफ वाली जिंदगी। जिसमें सनातन संस्कृति और संस्कृति की समृद्ध परंपरा है। सोशल मीडिया मंचों पर सक्रिय इन्ही युवाओं ने महाकुंभ को न भूतों न भविष्यति वाला महाकुंभ बनाने में अपना अहम योगदान दिया।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम तट पर मकर संक्रांति से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक कुल 45 दिनो तक चले इस महाकुंभ में इस बार युवाओं की रिकॉर्ड भागीदारी रही। महाकुंभ ने रील लाइफ में जी रहे युवाओं को सनातन परंपरा से जोड़ने में अहम भमिका निभाई। महाकुंभ में आने वाले लगभग 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं में से आधे से अधिक युवा थे। इस मौजूदगी के अलावा सोशल मीडिया मंचों पर सनातन धर्म, वेद-पुराण और गीता से जुड़े विषयों की खोज तीन सौ गुना तक बढ़ गई। इसने यह प्रमाणित कर दिया कि आज की नई पीढ़ी सनातन संस्कृति और अध्यात्म की ओर आकर्षित हुई है।

कुम्भ या महाकुंभ का इतिहास साक्षी है कि अभी तक आयोजित सभी कुंभों में धर्म परायण अधेड़ और बुजुर्ग श्रद्धालुओं का ही जमावड़ा होता था। इससे जुड़ी एक कहावत है कि कुम्भ नहा लिए मतलब जीवन में अपनी सभी जिम्मेदारियों को निभा चुके लोग ही कुम्भ स्नान व संगम तट पर कल्पवास के लिए जाते थे।

जबकि इस बार के महाकुंभ 2025 ने इन सभी कहावतों-भ्रांतियों को झूठा साबित कर दिया। उत्तर प्रदेश के सनातनी संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से इस महाकुंभ का दिव्य-भव्य डिजिटल स्वरूप दिया उसने युवाओं को खासा आकर्षित किया। युवाओं ने आयोजन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इसमें भी एआई आधारित कुंभ सहायक ऐप और गूगल नेविगेशन से युवाओं को सहायता मिली। यही वजह रही कि गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम में तकनीक और संस्कृति का भी  संगम बना, जिसमें युवाओं ने श्रद्धा की डुबकी लगा रिकॉर्ड कायम किया। लाखों-करोड़ों की संख्या में डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, प्रबंधक, टीचर, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, पत्रकार, खिलाड़ी, अभिनेता, मैन्यूफैक्चरर, ट्रेडर, सर्विस सेक्टर उद्यमी और कॉलेज की छात्र-छात्राएं आदि ने इसमें हिस्सा लिया।

लगभग पैंतीस करोड़ से अधिक युवाओं ने महाकुंभ से संबंधित फोटो और वीडियो गर्व के साथ सोशल मीडिया पर साझा किए। महाकुंभ आने वाले युवाओं को लगा कि डिजिटल क्रांति केवल कागजों पर नहीं बल्कि अब हकीकत बन चुकी है। युवाओं ने इसका पूरा श्रेय प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल प्रबंधन को दिया।

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