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निवेश के खेल में फेल होती सियासत

By Shakti Prakash Shrivastva on January 13, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश का राजनीतिक अतीत इस बात का गवाह है कि इस प्रदेश की राजनीति में शुरू से ही जातीय समीकरणों सहित पार्टी नीतियों की प्रतिबद्धताएं अहम रही हैं। लेकिन केंद्र और प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी की डबल इंजन की सरकारे लोकसभा चुनाव के पहले उत्तर प्रदेश में जिस तरह की सियासी जमीन तैयार कर रही हैं। उससे भविष्य में होने जा रही सियासत की अलग तस्वीर बनते दिख रही है। इस तस्वीर में परंपरागत जातिगत समीकरणों और मंदिर-मस्जिद विवाद सरीखे स्याह पड़ते रंगों की बजाय विकास और उसके लिए होने वाली निवेश की चटक स्याही भरी जा रही है। इस बाबत राज्य की योगी सरकार ने न केवल माहौल बना दिया है बल्कि उन्हे जमीन पर उतारने की कवायद भी शुरू कर दिया है।

सियासत के जानकारों की माने तो उनका स्पष्ट मत है कि बीजेपी की इस नई रणनीति को समझने के लिए प्रदेश में घटित हालिया सुर्खियों को पहले समझना होगा। जैस ही आप इन बिन्दुओ पर कॅन्सनट्रेट करेंगे तो सबसे पहले आपको यहां होने वाले निवेश और डेवलपमेंट के मॉडल समेत फॉरेन इन्वेस्टमेंट की चर्चाएं और कहानियां सुनाई देंगी। विधायी कार्यों के जानकार ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव की मुताबिक बीते कई दशकों में पहली बार उत्तर प्रदेश के सियासी फलक पर कुछ अलग किस्म के प्रयोग होते दिख रहे हैं। उनका मानना है कि इस बार होने वाले  लोकसभा के चुनावों में जो चुनावी मुद्दे दिखेंगे उसकी तस्वीर पूर्ववर्ती तस्वीरों से भिन्न होगी। जिस तरह उत्तर प्रदेश में डेवलपमेंट के लिए इन्वेस्टमेंट का मसौदा तैयार कर उसे अमली जामा पहनाया जा रहा है वो भावी मुद्दों की तासीर समझने के लिए काफी है।

सरकार के वरिष्ठ मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की मुताबिक इस समय उत्तर प्रदेश में जो माहौल है वैसा पूर्व में कभी नहीं दिखा। जिस तरह केंद्र और राज्य की सरकारें विकास के नए मॉडल प्रस्तुत कर रही है उससे जल्द ही प्रदेश की पूरी तस्वीर बदली हुई दिखेगी। उनके मुताबिक मुद्दों के अभाव में ही पूर्ववर्ती सरकारें जाति धर्म को मुद्दा बनाती थी। लेकिन बीजेपी सरकार ने उत्तर प्रदेश में इस तरह एक नई लकीर खींची है।

सियासी जानकारों का यह भी मानना है कि आगामी लोकसभा चुनाव में बेशक अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर एक बड़ा मुद्दा रहेगा लेकिन साथ-साथ उत्तर प्रदेश में होने वाले इंफ्रास्ट्रक्चरकल डेवलपमेंट और इन्वेस्टमेंट का यह स्वरूप भी बड़े मुद्दे के तौर पर सामने रहेगा। यदि सरकार का यह अभिनव प्रयोग सफल हो जाता हैतो यकीन मानिए आने वाले कई चुनावों में यह एक नजीर के रूप में होगा।

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