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June 20, 2026
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यूपी में एसपी-बीएसपी साथ-साथ !

By Shakti Prakash Shrivastva on March 15, 2025
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                                                                                         शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव एसपी और बीएसपी मिलकर लड़ेंगे। यह बात हम नहीं कर रहे है बल्कि इस बात की चुगली प्रदेश की मौजूदा सियासी तस्वीर कर रही है। एसपी को भी अन्य दलों के साथ गठबंधन का बखूबी अनुभव हो चुका है और बीएसपी भी पार्टी के अंदर से लेकर बाहर तक अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद कर रही है लिहाजा उसके सुप्रीमो मायावती का भी पहले वाला तेवर अब नरम पड चुका है। हालांकि उत्तर प्रदेश की सियासत पर बारीक नजर रखने वाले 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड को याद करते हुए इस पर बहस कर सकते है या इसे खारिज कर सकते है। क्योंकि वो मान चुके हैं कि ऐसा संभव नहीं हो सकता है। लेकिन उन्हे यह जरूर याद रखना चाहिए कि ये सियासत है। इसमे कोई किसी का स्थायी दोस्त या स्थायी दुश्मन नहीं होता है। परिस्थितियाँ सब कराने को मजबूर करती है। वैसे भी 2019 का लोकसभा चुनाव को भी याद करना चाहिए जिसमें एसपी-बीएसपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था।

हाल के दिनों में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने जिस तरह से अपने सियासी व्यवहार में परिवर्तन किया है उससे भविष्य में कुछ पार्टी लाइन से अलग होने की संभावना लगती है। सियासी गलियारे में जिस मायावती को बीजेपी की बी टीम के रूप में पहचान की जाने लगी थी वही मायावती अब खुलकर बीजेपी विरोध में मुखर होने लगी है। वैसे भी मायावती या उनकी पार्टी बीएसपी के लिए अब प्रदेश की सियासत में कुछ खोने के लिए रह नहीं गया है। प्रदेश में चार-चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी मायावती और उनकी पार्टी की जमीनी सियासी तस्वीर ये है कि उनका वोट शेयर 9.4 पर पहुँच चुका है। प्रदेश की विधानसभा में उनका मात्र एक विधायक है। विधान परिषद या लोकसभा में उसका एक भी प्रतिनिधि नहीं है। ऐसे में उन्हे अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए और लगभग डेढ़ दशक से सत्ता से बाहर रहते हुए अपने कार्यकर्ताओं को सँजोये रखने के लिए भी जरूरी है कि वो किसी अन्य दल से समझौता करें। ऐसा कर पार्टी अपना बेहतर भविष्य की संभावना तलाश सकती है। पार्टी के अंदर भी मायावती के उत्तराधिकारी और उनके भतीजे आकाश आनंद और उनके श्वसुर और पार्टी के कद्दावर नेता डॉ अशोक सिद्धार्थ को अलग करने के बाद स्थितियाँ बहुत सहज नहीं रह गई है। लिहाजा मायावती के लिए साझेदारी करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

इसी तरह एसपी को भी बेहतरी के लिए एक अदद साझेदार चाहिए। क्योंकि मौजूदा साझेदार कांग्रेस से उसका तालमेल बहुत संतोषप्रद नहीं है। क्योंकि उसके साथ रहने का फायदा कांग्रेस को ही अधिक हो रहा है बजाय एसपी के। लेकिन मायावती के साथ एसपी के भी फायदा मिलने की संभवना है।

ऐसी परिस्थिति में यदि एसपी और बीएसपी का गठबंधन प्रदेश में बनता है तो इसमें कही अचरज वाली बात नहीं है। ऐसा करना एसपी और बीएसपी दोनों ही के लिये फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

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