Responsive Menu
Add more content here...
October 9, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

  • Home
  • टॉप न्यूज
  • यूपी उपचुनाव : हार के डर से सियासी बलि देने को तैयार कांग्रेस !

यूपी उपचुनाव : हार के डर से सियासी बलि देने को तैयार कांग्रेस !

By Shakti Prakash Shrivastva on October 20, 2024
0 543 Views

                                                                                       शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

देश में बेशक कांग्रेस ने अपनी सियासी हैसियत ऐसी बना ली है कि उसे बीजेपी का विकल्प माना जाने लगा है। कई राज्यों और बीते लोकसभा चुनाव के परिणाम भी इस बात की चुगली करते हैं। लेकिन जहां तक उत्तर प्रदेश जैसे सियासी महत्व वाले सूबे की बात है तो वहाँ आज भी उसकी हैसियत बिना बैसाखी कुछ भी नहीं है। प्रदेश की सियासत में एक सांसद और दो विधायक लेकर हाशिये पर खड़ी कांग्रेस को सपा के सहारे लोकसभा चुनाव में आधे दर्जन सांसद बनाने का अवसर मिला था। अब जबकि प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव की दुदुंभी बज चुकी है। एक बार फिर कांग्रेस ने बतौर आइएनडीआईए गठबंधन सहयोगी सपा से सीटों की मांग की। न चाहते हुए भी सपा ने नौ में दो सीटे काँग्रेस को दी। लेकिन कोटे में मिली सीटों की सियासी नवइयत ऐसी थी कि वहाँ कांग्रेस के जीतने की संभावना न के बराबर थी। लिहाजा कांग्रेस ने हार की बजाय उन सीटों को सपा को सौंपते हुए उसे समर्थन देने का मन बना लिया है। एक तरह से इसे हार के डर से कांग्रेस का सियासी बलिदान माना जा रहा है।

उपचुनाव की घोषणा होने के बाद मीडिया की सुर्खियां बनी थी कि प्रदेश में सपा और काँग्रेस का गठबंधन नहीं होगा। इसके पीछे तर्क यह दिया गया कि हरियाणा चुनाव में गठबंधन का हिस्सेदार होने के बावजूद सपा को कांग्रेस ने एक भी सीट नहीं दी लिहाजा सपा सुप्रीमो अखिलेश भी अब यूपी के उपचुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं देंगे। लेकिन सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और काँग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच की समझ ने ऐसी स्थित बना दी कि सपा ने गाजियाबाद और अलीगढ़ की खैर विधानसभा की सीट कांग्रेस के हिस्से दे दी। लेकिन इन दोनों ही सीटों पर बीजेपी की स्थिति कांग्रेस और सपा की अपेक्षा काफी मजबूत है। ऐसे में कांग्रेस को इन सीटों पर अपनी हार सुनिश्चित लगने लगी। कांग्रेस हाइकमान मंथन के बाद इस नतीजे पर पहुंचा कि सीट हार कर कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की बजाय सीटों को सपा को देते हुए उसे हरसंभव सियासी मदद करने को आश्वस्त किया जाए। इससे एक तरफ उसकी नए सिरे से उबरती साख भी बच जाएगी और यह भी संदेश जाएगा कि जिस तरह हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा सपा को एक भी सीट नहीं दिए जाने के बाद भी सपा गठबंधन में बनी रही तो उसी तर्ज पर बिना किसी सीट के कांग्रेस भी सपा को मजबूत करने का काम करेगी।

ऐसा अगर कांग्रेस करती है तो यह उसकी सियासी परिपक्वता मानी जाएगी। क्योंकि कांग्रेस के खाते में जो दो सीटें मिली हैं वहाँ 2022 के विधानसभा चुनाव में गाजियाबाद में बीजेपी को  61.37 फीसदी, सपा को 18.25 फीसदी और कांग्रेस को 4.81 फीसदी वोट मिले थे। जबकि खैर विधानसभा चुनाव में बीजेपी के अनूप प्रधान को इस सीट पर 55 फीसदी से अधिक वोट मिले थे और सपा-रालोद के संयुक्त प्रत्याशी को 16 फीसदी से अधिक वोट मिले थे। कांग्रेस को यहाँ महज 0.6 प्रतिशत वोतो से संतोष करना पड़ा था। ऐसे में कांग्रेस की यह नीति सर्वथा हितकारी साबित होगी।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *