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August 9, 2026
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चुनाव जिताओ ‘मंत्री’ पद पाओ !

By Shakti Prakash Shrivastva on August 12, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

              उत्तर प्रदेश की सियासत में पिछले दिनों हुए बदलाव में एक अलग सियासी परिस्थिति सामने आई है। हुआ ये कि विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी गठबंधन छोड़कर सपा के साथ जाने वाले पूर्व मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर और पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान अब दोनों ही वापस बीजेपी के साथ आ चुके हैं। जब इनकी वापसी हुई तो ये कयास लगाया जाने लगा कि जल्द ही इन्हे पूर्व की भांति मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब जबकि राजभर के प्रभाव वाले और दारा सिंह चौहान के इस्तीफे से रिक्त हुई घोसी सीट का उपचुनाव घोषित हो चुका है। बीजेपी ने इस चुनाव को इन नेताओं के भविष्य के लिए परीक्षा की माफिक बना दिया है। उपचुनाव को लेकर परिस्थितियाँ ऐसी बन गई है कि ये उपचुनाव इन दोनों नेताओं के प्रभाव का लिटमस टेस्ट सरीखा हो गया है। भारतीय चुनाव आयोग ने घोसी विधानसभा की रिक्त हुई सीट के लिए 8 अगस्त को उपचुनाव का एलान किया है। इसके बाद इसी हफ्ते से नामांकन की प्रकिया शुरू हो गई है। नामांकन के लिए अंतिम तिथि 17 अगस्त रखी गई है। 5 सितम्बर को चुनाव के लिए मतदान होगा जबकि 8 सितम्बर को उपचुनाव के परिणाम आ जाएंगे।

अब चूंकि चुनाव की घोषणा हो चुकी है लिहाजा इन दोनों ही नेताओं को इस सीट को जीतने के लिए एंडी चोटी लगानी होगी। क्योंकि यह सीट दारा सिंह चौहान के इस्तीफे की वजह से रिक्त हुई है लिहाजा उन्हे यह सीट जीतकर यह प्रमाणित करना होगा कि उनके मतदाताओं का उनके ऊपर भरोसा अभी भी कायम है। वहीं ओम प्रकाश राजभर का प्रभाव क्षेत्र होने के नाते उन्हे भी इलाके में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए यह सीट हर हाल में जीतना होगा। सही मायने में यह उप चुनाव इन दोनों नेताओं के भविष्य का निर्धारण करने वाला साबित होगा। सियासी जानकारों की माने तो यदि ये सीट हार जाते हैं तो ऐसा माना जाएगा की इनका प्रभाव कमजोर हुआ है। ऐसे में संभव है कि बीजेपी के लिए इस उपचुनाव की हार इन नेताओं के लिए मंत्रिमंडल में शामिल होने का मार्ग अवरुद्ध कर दे। सुभासपा सुप्रीमो और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे ओम प्रकाश राजभर ने 15 जुलाई को दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने के बाद वहीं 16 जुलाई को पार्टी ज्वाइन किया था। जिसकी सूचना गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट के जरिए दी थी। जबकि दूसरे नेता दारा सिंह चौहान जो योगी सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री रहे और विधानसभा चुनाव के ठीक पहले बीजेपी छोड़ सपा से जा मिले थे। उन्होंने 17 जुलाई को लखनऊ में बीजेपी का दामन थामा था।

गठबंधन में शामिल होने के बाद इन दोनों ही नेताओं को योगी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद है। लेकिन पार्टी सूत्रों की मुताबिक इसके लिए बीजेपी की आलाकमान की हरी झंडी चाहिए होगी जो अभी तक नहीं मिली है। ऐसे में माना जा रहा है कि घोसी उपचुनाव के नतीजे राजभर और दारा सिंह का इंतजार खत्म कर सकते हैं। मऊ जिले की कुल 4 विधानसभा सीटों में से एक घोसी विधानसभा सीट भी हैं। यहां कुल 4 लाख 30 हजार के करीब मतदाता हैं।  इनमें मुस्लिम मतदाता लगभग एक लाख, दलित 70 हजार, यादव करीब 52 हजार और राजभर 58 हजार के लगभग मतदाता निर्णायक की भूमिका में हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में मऊ की 4 विधानसभा सीटों पर सपा और सुभासपा गठबंधन ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की थीं। सपा से गठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ आए ओम प्रकाश राजभर पर उपचुनाव में राजभर वोट बीजेपी में पक्ष में कराने की जिम्मेदारी होगी। वहीं दारा सिंह चौहान की साख भी दांव पर होगी क्योंकि उन्हें अपनी छोड़ी हुई सीट को वापस बीजेपी को दिलानी होगी। 2015 में बसपा से बीजेपी में शामिल होने वाले दारा सिंह चौहान के बारे में कहा जाता ही कि वो हमेशा से सत्ता के करीब रहना चाहते हैं। यही वजह हैं 2017 में मऊ जिले की मधुबन सीट से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद योगी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल हुए 2017 से 2022 तक मंत्री रहने के बाद दारा सिंह चौहान ने जनवरी 2022 में बीजेपी से इस्तीफा देते हुए सपा का दामन थाम लिया था। 2022 का विधानसभा चुनाव घोसी से जीतने के तकरीबन डेढ़ साल बाद बीजेपी में फिर से वापसी की है। जानकारों का यह भी मानना है कि इस बार दारा सिंह चौहान को बीजेपी अपना उम्मीदवार बना सकती है।

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