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बीजेपी प्रत्याशी को हराने की ठानी अखिलेश ने

By Shakti Prakash Shrivastva on January 11, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

देश में लोकसभा के चुनाव भले ही 2024 में होने है लेकिन सपा सुप्रीमो ने मंगलवार को ही लोकसभा चुनाव का चुनावी बिगुल फूँक दिया है। कन्नौज में मीडिया से मुखातिब अखिलेश यादव ने इस आशय का उद्घोष करते हुए कहा कि कन्नौज लोकसभा क्षेत्र से मैं चुनाव लड़ूँ या न लड़ूँ लेकिन यहाँ से बीजेपी प्रत्याशी को लाखों मतों से हराऊँगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार, सरकार नहीं है। वह बड़े उद्योगपतियों की मदद करने वाली संस्था है। हिंदी दिवस के मौके पर उन्होंने बीजेपी से अपनी भाषा सुधारने की अपील की। मंगलवार को कन्नौज के मां फूलमती देवी मंदिर पहुंचे अखिलेश ने वहाँ विधिवत देवी दर्शन व पूजा-अर्चना की। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि गरीब, मजदूर व किसान की मदद करना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार को चाहिए कि वो महंगाई व बेरोजगारी कम करने के लिए काम करें। लेकिन यह सरकार ऐसा न कर उद्योगपतियों की मदद कर रही हैं।

उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धसकने के मामले में उन्होंने कहा कि यह जनता से जुड़ा विषय है। यदि हमलोग वैज्ञानिकों व पर्यावरण विभाग की नहीं मानेंगे तो ऐसी ही घटनाएं होंगी। उन्होंने ऐसे में सरकार से पीड़ितों की मदद करने की अपील भी की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि चाय का स्वाद देश ने देख लिया है। कानपुर देहात में बलवंत सिंह, गाजियाबाद में ऑटो ड्राइवर और तालग्राम क्षेत्र में पूर्व प्रधान की हत्या के मामले में उन्होंने अधिकारियों को दोषी बताया। कन्नौज के विकास को अवरुद्ध करने का बीजेपी पर आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी ने यूपी को लूटने के अलावा कोई काम नहीं किया। सपा सरकार में जो भी विकास कार्य कराए गए थे उसे इस सरकार ने बंद कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी सरकार में लोगों के साथ अन्याय हो रहा है। जसोदा में बन रहे उद्योगपति अडानी के कारखाने के बाबत उन्होंने कहा कि मैंने सुना था कि यह गोसेवा के लिए चारा बनाने का प्लांट बन रहा है पर यहां तो कुछ और ही बन गया। इस तरह अखिलेश के बयान पर राजनीतिक पंडितों का मानना है कि कुछ मायनों में अखिलेश को अभी भी धैर्य रखना होगा। उन्हे इस बात का स्मरण होना चाहिए कि कुछ इसी तरह के अति उत्साही बयान उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान भी दिए थे। जिस पर उनके पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं तक ने असंतोष जाहिर की थी। परिणाम भी अनुकूल नहीं रहे थे। ऐसे में पूर्व की तुलना में काफी हद तक राजनीतिक परिपक्वता दर्शा रहे अखिलेश को इस बाबत भी मनन करना होगा।

 

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