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सीनियरों के रहते जूनियर राजीव का डीजीपी बनना!

By Shakti Prakash Shrivastva on June 4, 2025
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                                                                                  शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश में काफी हद तक संगठित अपराध को नियंत्रित करने के बावजूद अभी भी पुलिस के लिए बहुतेरी चुनौतियाँ है जिस पर उसे पार पाना है। ऐसे में कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को पीछे कर प्रदेश के पुलिस महकमे के सबसे बड़ी यानि डीजीपी की कुर्सी पर 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को तैनात किया जाना जहां कई तरह के सवाल खड़े करता है वहीं कई सवालों के जवाब भी देता है। मसलन सीनियारिटी को दरकिनार करने पर सवाल उठता है लेकिन वहीं लगभग साठ हजार सिविल पुलिस भर्ती की सकुशल सफलतापूर्वक परीक्षा सम्पन्न करा ने के चलते उनकी दक्षता भी प्रमाणित होती है। इसके अलावा मिली जानकारी की मुताबिक इन्हे भी कार्यवाहक डीजीपी यानि डायरेक्टर जनरल आफ पुलिस ही बनाया गया है। इस तरह ये प्रदेश के पाँचवे कार्यवाहक डीजीपी है। हिन्दी में इस पद को पुलिस महानिदेशक कहा जाता है।

राजीव कृष्ण का पुलिस सेवा में लंबा और प्रभावी अनुभव उन्हें इस पद के लिए एक सशक्त दावेदार बनाता है। वह एक इंजीनियरिंग स्नातक हैं, और अपनी सेवा के दौरान उन्होंने अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था और खुफिया सूचनाओं के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वे माफिया और संगठित अपराध के विरुद्ध की गई कई सफल कार्रवाइयों के लिए भी जाने जाते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि योगी सरकार ने वरिष्ठता की बजाय प्रशासनिक क्षमता और कार्यकुशलता को प्राथमिकता दी है।

प्रदेश में सिपाही नागरिक पुलिस के 60,244 पदों सीधी भर्ती की लिखित परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद प्रदेश सरकार ने राजीव कृष्णा को भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने इस प्रतिष्ठापरक परीक्षा को सकुशल संपन्न कराया था। यह भी एक वजह है जिसके चलते उनको प्रदेश पुलिस का मुखिया बनाने योग्य समझा गया। राजीव कृष्णा लखनऊ समेत कई जिलों के पुलिस कप्तान और लखनऊ के एडीजी जोन भी रह चुके हैं। उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी हैं और लखनऊ स्थित आयकर विभाग के मुख्यालय में तैनात हैं।

उन्हे डीजीपी बनाने के लिए वर्ष 1989 बैच के शफी अहसान रिजवी, आशीष गुप्ता, आदित्य मिश्रा, वर्ष 1990 बैच के संदीप सालुंके, दलजीत सिंह चौधरी, रेणुका मिश्रा, बिजय कुमार मौर्य, एमके बशाल, तिलोत्तमा वर्मा, वर्ष 1991 बैच के आलोक शर्मा और पीयूष आनंद जैसे ग्यारह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को बाइपास किया गया।

प्रदेश की योगी सरकार ने डीजीपी चयन प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव करते हुए डीजीपी की नियुक्ति स्थानीय सतार पर ही करने का निर्णय लिया है। पहले इसके लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाता था। अब प्रदेश में इसके लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक चयन समिति का गठन किया गया है।

कुल मिलाकर, यह नियुक्ति उत्तर प्रदेश में पुलिस सुधारों और कानून-व्यवस्था को लेकर योगी सरकार की गंभीरता को दर्शाती है, जिसमें वरिष्ठता से अधिक महत्व अब काबिलियत और परिणाम आधारित नेतृत्व को दिया जा रहा है।

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