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महाकाल, बिच्छू और ईगल जैसे नाम के व्हाट्सअप ग्रुप से हो रहा अपराध

By Shakti Prakash Shrivastva on April 5, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

अस्सी के दशक में गोरखपुर का नाम देश ही नहीं दुनिया में अपराध के लिए सुर्खियों में रहा है। लेकिन अब मौजूदा साइबर युग में इसका भी स्वरूप बदल गया है। अब कॉरपोरेट की तर्ज पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर जिले के बदमाश अपना गिरोह संचालित कर रहे हैं। बिच्छू, ईगल, देवा, महाकाल, गैंगस्टर, एके-47, गुंडों की टोली, एम के लिए काम जैसे नामों से संचालित हो रहे इन व्हाट्सएप ग्रुप में सर्वाधिक संख्या उन युवाओं की है जिनमे दबंग कहलाने का शौक है। किसी भी आपराधिक घटना को अंजाम देने के लिए ग्रुप एडमिन की तरफ से जैसे ही ग्रुप में मैसेज फ्लैश होता है। चंद मिनटों में ही ग्रुप के सदस्य तय जगह पर पहुंच जाते हैं और वारदात हो जाती है। इसकी इलाकाई पुलिस को बखूबी जानकारी है। जिले के बेलघाट इलाके का एक शख्स मध्य प्रदेश के उज्जैन से असलहे मंगाकर बेचने के आरोप में तीन लोगों को पुलिस ने पकड़ा था। तब पहली बार कुछ ग्रुप के नाम सामने आए थे।

24 मई 2020 को खोराबार के रामनगर कड़जहां गांव के चचेरे भाई दिवाकर निषाद और कृष्णा की झंगहा के गौरीघाट बांध के किनारे गोली मारकर हत्या की गई थी। इस मामले में 12 आरोपियों को जेल भेजा था, जिसमें महाकाल ग्रुप और बिच्छू ग्रुप का नाम सामने आया था। 2018 में चौरीचौरा इलाके में रोडवेज की बस में तोड़फोड़ की गई थी। इसमें ईगल ग्रुप का नाम आया था। पुलिसिया तफतीश में पता चला कि बस में एक यात्री से बहस हो गई थी। इसके बाद उसमें बैठे युवक ने ईगल ग्रुप पर संदेश चलाया और रात 12 बजे चौरीचौरा में बस के पहुंचते ही तोड़फोड़ की गई। 24 मई 2020 को झंगहा इलाके में दो चचेरे भाइयों की दावत के बहाने बुलाकर हत्या कर दी गई थी। तब पुलिस ने 12 युवकों को गिरफ्तार किया था। पता चला कि महाकाल ग्रुप के एक संदेश पर वहां पर सभी युवक पहुंचे थे और फिर हत्या हो गई थी।

इन ग्रुपों में पेशेवर अपराधी नहीं है। इनमे वो हैं जिनके मन में अपराध का शौक है। कम उम्र में भौकाल बनाने की चाहत में युवा तिकड़मी दिमाग वाले बदमाशों के बिछाए जाल में फंसते है। गुंडा, महाकाल, बिच्छू, एके 47 जैसे ग्रुप से जुड़े ज्यादातर सदस्य 16 से 25 साल की उम्र के हैं। आसानी से इलाके में भौकाल बनाने की चाहत में ग्रुप के सदस्य बनते हैं और फिर वह अपराध के रास्ते पर चल पड़ते है। घरवालों को भी इसकी भनक तभी लग पाती है, जब वह किसी मामले में पकड़े जाते हैं।

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