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August 10, 2026
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सपा के लिए भारी न पड जाए कांग्रेस की ये चाल

By Shakti Prakash Shrivastva on July 10, 2024
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                                                                                          शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

लोकसभा के बीते चुनाव में जिस तरह से विपक्षी गठबंधन खासकर कांग्रेस पार्टी को जनसमर्थन मिला है उससे कांग्रेस का अति उत्साहित होना लाजिमी भी है। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में अगर बात करें तो पार्टी को इस लोकसभा चुनाव में नया जीवन मिला है। जो कांग्रेस उत्तर प्रदेश में कई-कई बार सरकार चला चुकी हो उसकी हालत बद से बदतर हो गई थी। प्रदेश की विधानसभा में उसके मात्र दो सदस्य रह गए है वो भी पार्टी की वजह से नहीं बल्कि अपने रसूख की वजह से जीते हैं। विधान परिषद में पार्टी का एक भी सदस्य नहीं है। पूरे सूबे में पार्टी कैडर लगभग न के बराबर रह गए है। पिछली लोकसभा में पार्टी की सोनिया गांधी के रूप में मात्र एक सांसद था जबकि इस बार उसके सात सांसद जीते हैं। हालांकि इस जीत में पार्टी से ज्यादा विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए खासकर समाजवादी पार्टी का प्रभाव रहा। समाजवादी पार्टी की जीत भी उसके नए सियासी प्रयोग पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों के पीड़ीए फार्मूले की वजह से हासिल हुई। अब चूंकि कांग्रेस पार्टी भी प्रदेश में जातिगत वोटबैंक बढ़ाने के मूड में आ गई है। देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री स्व. जगजीवनराम की पुण्यतिथि (6 जुलाई) पर पार्टी ने आयोजन कर इस मुहिम की शुरुआत भी कर दी है। लेकिन कांग्रेस का यह चाल आने वाले समय में सपा और अखिलेश यादव के लिए दुश्वारियां पैदा कर सकती है।

हालांकि लोकसभा चुनाव परिणाम से पार्टियों में पनपे उत्साह से अभी अधिकांश पार्टियां उबर नहीं पाई हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतेगा और उत्साह की यह खुमारी दलों से उतरेगा और उनके नेताओं को इसका असर समझ आने लगेगा तब गठबंधन का आकार-प्रकार बदलने जैसी गतिविधियां भी होने लगेंगी। इसमे सर्वाधिक संकट की स्थिति सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के साथ आने वाली है। चूंकि उन्होंने ही बीते चुनाव में यह फार्मूला इंटरोडयूस किया था लिहाजा इसी फार्मूले पर जब उसकी ही सहयोगी पार्टी चलने लगेगी तो सियासी दुश्वारियाँ पैदा होनी शुरू हो जाएंगी। जैसे-जैसे समस्याए सिर उठायेंगी दलों के बीच का आपसी भाईचारे पर संकट आने लगेगा।

जबकि कांग्रेस पार्टी योजनाबद्ध तरीके से इस योजना को धरातल पर लाने पर आमादा है। उसके रणनीतिकारों का मानना है कि इससे एक तरफ कार्यकर्ताओं में सक्रियता बनी रहेगी तो दूसरी तरफ संबंधित जाति के लोगों के बीच पार्टी से जुड़ाव भी बढ़ेगा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय स्वयं बाबू जगजीवन राम की पुण्यतिथि पर दलित बस्ती में आयोजित पार्टी के सहभोज कार्यक्रम में शामिल हुए थे। पार्टी के हर नेता ने कहीं न कहीं कार्यक्रम आयोजित किए। आगे अब यह सिलसिला चलता रहेगा।

 

 

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