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यूपी विधानसभा चुनाव 2022 : करहल में अखिलेश यादव के सामने एक बार फिर एस पी सिंह बघेल

By Shakti Prakash Shrivastva on February 2, 2022
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लखनऊ, (प्रमुख संवाददाता)। उत्तर प्रदेश में बीजेपी की दुबारा सरकार बनाने की राह में सबसे बड़े रोड़ा बने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इस बार मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से सपा-रालोद गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी है। इनके सामने मुख्य प्रतिद्वंदी के रूप में आगरा से बीजेपी सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस पी सिंह बघेल बतौर बीजेपी प्रत्याशी है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब अखिलेश के सामने प्रो. बघेल चुनाव लड़ रहे है। इसके पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में इन दोनों धुरंधरों का सामना फिरोजाबाद में हो चुका है। फर्क इतना था कि उस समय अखिलेश जहां एसपी पार्टी के उम्मीदवार थे वहीं प्रो. बघेल बसपा के और चुनाव भी विधानसभा का नहीं लोकसभा का था। इस बार प्रो. बघेल के लिए यह चौथा मौका है जब वो सैफई के मुलायम कुनबे के सामने चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 के लोकसभा के चुनाव में अखिलेश ने प्रो. को लगभग 67 हजार वोटों से पराजित किया था। अखिलेश यादव को 287011 और एसपी सिंह बघेल को 219710 वोट मिले थे। इस चुनाव में अखिलेश फ़िरोज़ाबाद और कन्नौज दो सीटों से चुनाव जीते थे। बाद में उन्होने फिरोजाबाद सीट छोड़ दी थी। फिरोजाबाद में हुए उपचुनाव में सपा प्रत्याशी डिम्पल यादव (पत्नी अखिलेश यादव) के सामने भी बतौर बसपा प्रत्याशी प्रो. बघेल ने अपने दमदार उपस्थिति से न केवल स्वयं हारे बल्कि डिम्पल को भी लोकसभा नहीं पहुँचने दिया। इस चुनाव में कांग्रेस के राजबब्बर ने जीत हासिल की थी। सैफई के राजनीतिक मुलायम परिवार से प्रो. बघेल का चुनावी युद्ध यहीं नहीं थमा। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी (बसपा छोड़ बीजेपी में शामिल) से एसपी सिंह बघेल ने फिरोजाबाद सीट से ही सपा के अक्षय यादव से मुकाबला किया। हालांकि तब भी उन्हें 114059 वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा। इस बार मुलायम परिवार के सामने चौथी बार प्रत्याशिता कर रहे प्रो. बघेल की वजह से करहल विधानसभा का चुनाव बड़ा रोचक हो गया है। हालांकि यहाँ बसपा से कुलदीप नारायण उर्फ दीपक पेंटर चुनाव मैदान में है। लेकिन समीकरणों और प्रभाव के लिहाज से मुख्य मुक़ाबला इन्हीं दो धुरंधरों के बीच माना जा रहा है। यहाँ कांग्रेस पार्टी ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। अब देखना ये दिलचस्प हो गया है कि यहाँ बीजेपी के प्रो. बघेल, मुलायम कुनबे से हो रहे अपने चौथे मुक़ाबले में हार का सिलसिला तोड़ जीत का स्वाद चखते है या फिर एक बार हार से संतोष करने को मजबूर होते है।

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