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धर्मनगरी में अधर्म का प्रतीक बन गया था ‘अतीक’

By Shakti Prakash Shrivastva on April 17, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

      सदियों से संगमनगरी प्रयागराज की पहचान एक आध्यात्मिक शहर के रूप में रहा है। लेकिन कुछ ऐसी घटनाए भी यहाँ हुई हैं जिनकी वजह से इस शहर के ललाट पर अपराध का दाग भी चस्पा होता रहा है। यानि धर्मनगरी में अधर्म यानि अपराध को भी जगह मिलती रही है। नब्बे के दशक में इसका सबसे बड़ा पालनहार अतीक अहमद के रूप में सामने आया।

आजाद हिंदुस्तान के इतिहास में सबसे बड़ा दाग इस नगर में 1996 में लगा जब बालू ठेके के विवाद के चलते पूर्व विधायक जवाहर पंडित की सिविल लाइंस इलाके में करवारिया बंधुओं ने एके 47 से भून दिया था। इनमे श्याम नारायण करवारिया उर्फ मौला महराज, कपिल मुनि करवारिया, सूरजभान करवारिया और उदयभान करवारिया शामिल थे। दिन दहाड़े हुई इस वारदात में दोष साबित होने में 23 साल लग गया। अंततः बीजेपी एमएलए, बीजेपी एमएलसी और बीएसपी एमपी रह चुके तीनों करवारिया बंधुओं को उम्रकैद की सजा हुई। तीनों जेल में बंद हैं। बाद के दिनों में शहर के चर्चित माफिया चांदबाबा की हत्या कर रातों रात अतीक अहमद डान बन गया था। शहर पश्चिमी विधानसभा से बाद में निर्दलीय चुनाव लड़ विधायक भी बन गया। बाद में पाँच बार विधायक और एक बार सांसद रहा। 25 जनवरी 2005 को शहर पश्चिमी से बीएसपी के सीटींग विधायक राजूपाल की दिन दहाड़े नृशंस हत्या का भी मुख्य आरोपी रहा अतीक। गोलीबारी में राजू के साथ दो अन्य संदीप और देवीलाल भी मारे गए। मुकदमा अभी भी चल ही रहा है। इस तरह के और भी सैकड़ों हत्या, अपहरण, रंगदारी, मारपीट आदि के मुकदमे अतीक पर थे लेकिन सिर्फ उमेश पाल के अपहरण के मामले में ही उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई वो भी पिछले 28 मार्च को। अहमदाबाद के साबरमती जेल में अतीक और बरेली जेल में उसका भाई अशरफ बंद थे। जेल में रहते हुए ही साजिश कर अतीक ने 24 फरवरी को दिन दहाड़े राजूपाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की प्रयागराज में गोलिया और बम बरसाकर हत्या करा दी। इसके बाद मौजूदा योगी सरकार ने अतीक और अतीक के साम्राज्य को नेस्तनाबूद करने का निर्णय लिया। देखते-देखते उमेश पाल की हत्या में शामिल अतीक का बेटा और तीन अन्य शूटर पुलिसिया मुठभेड़ में मारे गए। इसी मामले में अपनी-अपनी जेलों से कोर्ट में पेशी पर प्रयागराज आए अतीक और अशरफ के साथ भी 15 अप्रैल की रात वही हो गया जैसा इन्होंने कइयों के साथ किया। मतलब पुलिस कस्टडी में जब इन्हे रात साढ़े दस बजे के लगभग काल्विन अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए ले जाया जा रहा था। उसी समय मीडिया पर्सन बनकर आए तीन बदमाशों ने अत्याधुनिक पिस्टल से कई राउंड गोलिया दागकर दोनों की हत्या कर दी। अतीक और अशरफ की मौत भले ही कानून सम्मत नहीं है लेकिन जिन घरों का चिराग, सिंदूर या भविष्य इनकी वजह से उजड़ा है उनके लिए ऐसा अधर्म पर धर्म की विजय सरीखा है।

 

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