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ऐतिहासिक महलों में होटल सा लुत्फ !

By Shakti Prakash Shrivastva on August 20, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                           राजस्थान और मध्यप्रदेश की तरह उत्तर प्रदेश में भी मुगलकालीन किलों आदि के अलावा राजे-रजवाड़ों के बहुतेरे इतिहास प्रसिद्ध धरोहरों के रूप में किले मौजूद है। कुछ एक को छोड़ दें तो अधिकांशतः देखरेख के अभाव में आज जीर्ण-शीर्ण हालत में है। उत्तर प्रदेश की मौजूदा योगी आदित्यनाथ सरकार ने इन महलों की सुधि लेते हुए इनकी देखरेख सुनिश्चित करने को निर्णय लिया है। इसके लिए सरकार ने इसे हेरिटेज पर्यटन का नाम देते हुए प्रोत्साहित करने का मन बना लिया है। इस बाबत पहले चरण में सरकार प्रदेश के 9 महलों और हवेलियों में फाइव स्टार सुविधा वाले होटल खोलने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सरकार ने इसके लिए निजी क्षेत्र को भागीदार बनाने का निर्णय लिया है। निजी क्षेत्र से होने वाले निवेश के माध्यम से विरासत रूपी महल-हवेलियों आदि संपत्तियों को सरकार उसके प्राचीन गौरव के साथ पुनर्स्थापित करने का काम करेगी। इसके जरिए पर्यटन के क्षेत्र में युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसरों का सृजन भी होगा। साथ ही ग्रामीण पर्यटन, संस्कृति और स्थानीय क्षेत्र के आर्थिक कायाकल्प को भी बढ़ावा मिलेगा।

इसके लिए सरकार की ओर से बनाई गई योजना की मुताबिकउत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से लखनऊ के छत्तर मंजिल, मिर्जापुर के चुनार का किला,  झांसी का बरुआ सागर किला, लखनऊ की कोठी गुलिस्ता-ए-इरम, कोठी दर्शन विलास और कोठी रोशन, मथुरा के बरसाना जल महल, कानपुर का शुक्ला तालाब और बिठूर के टिकैतराय बारादरी को हेरिटेज होटल का रूप देने की तैयारी की जा रही है। इसे अंजाम देने के लिए सरकार की ओर से तीन श्रेणियाँ निर्धारित की गई हैं। इसके लिए कुल प्रस्तावित न्यूनतम निवेश धनराशि 180 करोड़ रुपए सुनिश्चित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पर्यटन विभाग की ओर से इन सभी चिन्हित विरासत संपत्तियों में वेलनेस सेंटर, हेरिटेज होटल, माइस एक्टिविटी सेंटर, रिजॉर्ट, म्यूजियम, हेरिटेज रेस्टोरेंट, बुटिक रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, वेडिंग टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, होम स्टे, थीमैटिक पार्क और अन्य टूरिज्म एवं हॉस्पिटैलिटी यूनिट आदि का निर्माण कराया जाएगा। इस संदर्भ में कुछ महीने पहले ही लगभग 41 हेरिटेज उद्यमियों ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकर प्रदेश के विरासत भवनों में अपनी रुझान दर्शाया था। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार की मंशा को सफलता पूर्वक अमली जामा पहनाने के लिए पर्यटन विभाग भी गंभीरता से लगा हुआ है। उसकी तरफ से इस बाबत मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, ओडिशा और राजस्थान सरीखे राज्यों के विरासत भवनों का अध्ययन भी किया गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार की इस प्रस्तावित योजना को टूरिज्म इंडस्ट्री के दिग्गजों की ओर से भी हाथों हाथ लिया जा रहा है। प्राचीन धरोहर भवनों के एडॉप्टिव रियूज और इसमें निवेश के लिए इच्छुक मुख्य होटल ग्रुप्स में लीला होटल्स, नीमराना होटल्स, ताज होटल्स वाली इंडियन होटल्स कंपनी,  महिन्द्रा होटल्स एंड रिजॉर्ट, ओबेरॉय होटल्स, दि एमआरएस ग्रुप एंड रिजॉर्ट, ललित होटल्स, हयात रिजेंसी, सरोवर होटल्स एंड रिजॉर्ट्स, एकोर ग्रुप, टीएचएफ होटल्स, लैंजेर होटल्स, रॉयल आर्किड होटल्स, रमाडा होटल, क्लार्क होटल, ब्रिजरमा ग्रुप्स ऑफ होटल्स आदि समूह शामिल हैं। इन सभी ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट में भी रुचि दिखाई है। बकायदे इसके संरक्षण के लिए मापदंड और दायित्व भी तय किए गए हैं। प्रमुख सचिव एवं महानिदेशक पर्यटन मुकेश मेश्राम की मुताबिक परियोजना के लिए सफल टेंडर का चयन गुणवत्ता और लागत प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। इसमें पुरातत्विक भवन का विन्यास यथावत रखने, मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन ना करने, भवन का उपयोग उसके पौराणिक तथा ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप किये जाने, विरासत भवन के इतिहास के संबंध में विकासकर्ता द्वारा इन्फॉमेटिक साईनेजेज की स्थापना करने, स्थानीय संस्कृति, खान-पान, कला, पोशाक, व्यंजन तथा सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन, सीएसआर के अंतर्गत चयनित विकासकर्ता द्वारा निकटवर्ती ग्रामों को अंगीकृत करते हुए विकसित किया जाएगा।  इसके साथ ही इसमें 25 प्रतिशत स्थानीय नागरिकों को रोजगार प्रदान किया जाना शामिल है।

 

 

 

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