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October 8, 2026
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सपा नहीं लड़ेगी पंचायत चुनाव!

By Shakti Prakash Shrivastva on October 22, 2025
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                                                                               शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव होना है। इसके पहले प्रदेश में पंचायत चुनाव होगा। सभी सियासी दल पंचायत चुनाव को विधानसभा का सेमी फाइनल मानते हुए अपनी तैयारियां कर रहे हैं। प्रदेश के दो प्रमुख सियासी दलों में जहां बीजेपी अन्य चुनावों की तरह इस चुनाव को भी प्रतिष्ठा का चुनाव मानकर विजेता बनने के हर जतन कर रही है वहीं समाजवादी पार्टी इसे विधानसभा की तैयारियों में रोड़ा मानते हुए इससे दूरी बनाने के मूड में है। क्योंकि इस बार सपा विधानसभा चुनाव को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है। उसका मानना है कि इससे प्रतिष्ठापरक चुनावी टेम्पो प्रभावित होगी। यही वजह है कि पार्टी पंचायत चुनाव मे अपने सिंबल पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी।

जहां तक पंचायत चुनाव का प्रश्न है तो वो 2026 में होना है। लेकिन सियासी दल इसे विधानसभा चुनाव का सेमी फाइनल मानते हुए पूरी शिद्दत से पंचायत चुनाव की तैयारियों में लग गए है। लेकिन सपा की चुनाव से अपने को दूर रखने के पीछे उसकी अपनी सियासी रणनीति है। ऐसा नहीं कि ऐसा पहली बार हो रहा है। इसके पहले भी ऐसा हुआ है। पिछले ही पंचायत चुनाव में सपा ने अपने सिंबल पर कोई उम्मीदवार नहीं लड़ाया था। अलबत्ता जिला स्तर पर जहां भी समझौते से बात बन जा रही थी, पार्टी उसको समर्थन दे रही थी। पिछले दिनों दिए गए पार्टी के महासचिव शिवपाल यादव के बयान के बाद से पंचायत चुनाव में सपा की रणनीति का स्टैंड साफ हो गया था। लेकिन अब दावा किया जा रहा है कि सपा ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के पदों पर प्रत्याशी नहीं उतारेगी। पार्टी का मानना है कि अगर वो चुनाव मैदान मे उतरती है तो उसे आगामी विधानसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह अलग बात है कि इन चुनावों में विजयी हुए नेताओं को वो सैद्धांतिक स्तर पर सहमति के आधार पर अपने साथ जोड़ सकती है।

सपा इन दिनों विधानसभा चुनाव को लेकर काफी गंभीर है। इस बार के विधानसभा चुनाव को पार्टी अपने अस्तित्व के लिए सबसे अहम मान रही है। इस बार के चुनाव में हासिल जनसमर्थन पार्टी का भविष्य भी तय करेगी। यही वजह है कि पार्टी हाइकमान पंचायत चुनाव में अधिकृत तौर पर उतरने से परहेज कर रही है। उसे ऐसा लगता है कि अगर पार्टी पंचायत के चुनाव में उतरेगी तो उनके कार्यकर्ताओं का टेम्पो जिसका इस्तेमाल पार्टी विधानसभा चुनाव में करना चाहती है वो डिगेगा। उनके गंभीर प्रयासों पर गलत प्रभाव भी पड़ने की उम्मीद है। लिहाजा पार्टी इस बाबत कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। इन्ही कारणों से पार्टी पिछले बार के चुनाव की तरह ही इस बार भी चुनाव मैदान में नहीं उतर रही है। हालांकि इस बाबत अनंतिम निर्णय पार्टी हाइकमान यानि पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को लेना है। लिहाजा तब तक यह संशय बना रहेगा कि पार्टी पंचायत चुनाव लड़ेगी या नहीं लड़ेगी।
सपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि पंचायत चुनाव में उतरने या न उतरने को लेकर अंतिम फैसला उनके मुखिया अखिलेश यादव को लेना है। वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं विधायक शिवपाल यादव पहले ही पंचायत चुनाव को लेकर क्लियर कट जवाब दे चुके हैं। शिवपाल यादव ने बीते दिनों अपने एक बयान में कहा था कि समाजवादी पार्टी आगामी पंचायत चुनाव में ग्राम सभा, प्रधानी और बीडीसी के चुनाव में भाग नहीं लेगी।

 

 

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