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June 20, 2026
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योगीराज में नहीं चलेगी ऐसी सियासत !

By Shakti Prakash Shrivastva on June 19, 2025
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                                                                            शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

कानपुर इन दिनों मीडिया की सुर्खियां बटोर रहा है। मामला है जिले के दो आला अफसरों के बीच आपसी विवाद का। विवाद उतना उलझाऊ नहीं है जितना उसे तूल दिया गया है। एक जिले का जिलाधिकारी अगर किसी बात की जानकारी अपने अधीनस्थ से जानना चाहता है तो उसे इस बात का अधिकार है। वो अपने मातहत से महज ये जानना चाहता है कि जिसमें उनके और उससे संबंधित कोई आडियो क्लिप वायरल हुई है तो उसकी सच्चाई क्या है। इस पर मातहत ने पल्ला झाड़ते हुए उस अडियो को अपना न बताते हुए कहा कि ये कोई साजिश है आवाज मेरी नहीं है बल्कि आज की अत्याधुनिक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस द्वारा बनाई गई है। इस पर जिलाधिकारी ने मातहत से इस मामले पर प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा। अगर यथार्थ मामला माना जाए तो इस पर प्राथमिकी दर्ज होनी ही चाहिए थी। लेकिन जहां सामान्य स्थिति में एक एफआईआर से पटाक्षेप हो सकता था वहाँ मामले ने खासा तूल पकड़ लिया है।

सीएमओ डॉ हरीदत्त नेमि ने मीडिया में आडियो क्लिप को साजिश करार देते हुए जिस तरह का बयान दिया है कि मेरे काम से स्थानीय जनप्रतिनिधि खुश है। और इसके बाद उनके पक्ष में विधानसभाध्यक्ष सतीश महाना और बीजेपी के दो विधायक सुरेन्द्र नथानी और अरुण पाठक के लिखे पत्र का वायरल होना कुछ और एंगील पर सोचने को विवश करता है। और तो और इनमे से ही एक विधायक ने तो मीडिया के सामने यह भी माना कि पत्र मुझसे लिखवाया गया है। दूसरी तरफ इसके विरोध में बीजेपी के ही दो विधायकों महेश त्रिवेदी और अभिजीत सिंह सांगा ने पूरा विवाद शासन स्तर तक पहुंचाने की बात करते हुए सी एम ओ के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। जबकि इन सब विवाद से बेपरवाह कानपुर के बीजेपी सांसद रमेश अवस्थी अपने कानपुर के विकास, कार्यकर्ताओं के सम्मान और संगठन की मजबूती के संकल्प को साधने में तल्लीन है। पूरे प्रकरण पर उनका स्पष्ट मानना है कि मामला शासन के संज्ञान में है। शासन समय पर उचित निर्णय करेगा।

इस तरह अब तो स्पष्ट हो गया है कि यह मामला सियासी रंग लेने लगा है। मामले में स्थानीय बीजेपी दो खेमे में बँटी हुई लग रही है। लेकिन यह मामला ऐसे समय में तूल पकडा है जब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है। वो सरकार जो प्रशासनिक अधिकारियों खासकर जनहित में कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करती है और कार्य व्यवहार में सियासत करने वालों को जड़ से उखाड़ फेंकने के प्रति संकल्पित है। ऐसे में यह तो तय है कि यह मामला कुछ गुल जरूर खिलाएगा। जहां तक दोनों अधिकारियों यानि डीएम जे पी सिंह और सीएमओ डॉ हरीदत्त नेमि की वर्किंग का सवाल है तो डीएम जे पी सिंह, सीएम के शहर गोरखपुर में बतौर सिटी मजिस्ट्रेट रहते हुए अपने प्रशासनिक दक्षता का एहसास करा चुके है। स्वयं सीएम योगी आदित्यनाथ भी उनके कार्यशैली से बखूबी वाकिफ है। और सीएमओ डॉ हरीदत्त बेशक दक्ष अधिकारी है लेकिन जिस तरह इस मामले को सियासी रंग देने में सहभागी बनते दिख रहे है उससे सियासी गलियारों में ऐसा माना जा रहा है कि चीफ मेडिकल आफिसर यानि सीएमओ पर ही मामले का ठीकरा फूट सकता है। इन्हे हटाया जा सकता है।

पूरा मामला ये है कि एक आडियो क्लिप वायरल हुई जिसमें ऐसा दावा किया जा रहा है कि एक व्यक्ति जिसे सीएमओ बताया जा रहा है वो डीएम के बारे में आपत्तिजनक बातें करता है। एक क्लिप में कहता है कि 75 जिले में ऐसा डीएम नहीं देखा जो इस तरह से बात करता हो। दूसरे क्लिप में पैसे की व्यवस्था को लेकर बात होती है। जिसमे कहा गया है कि हर महीने की आमदनी निकालनी है कोई तरीका बताओ। इस मामले में डीएम जे पी सिंह का रुख स्पष्ट है। अगर आडियो फर्जी है तो दोषियों पर एफआईआर हो और अगर सही है तो सीएमओ पर कार्रवाई हो। जो जायज भी है। इसी बात को लेकर एक बैठक से डीएम ने सीएमओ से बाहर निकलने को कह दिया था। यही से इस मामले ने तूल पकड़ा या पकड़ाया गया। अब इस पूरे मामले पर शासन की कार्रवाई का इंतजार है।

 

 

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