Responsive Menu
Add more content here...
August 11, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

यूपी विधानसभा चुनाव : योगी का ‘गढ़’ भेदना विपक्ष के लिए कड़ी चुनौती

By Shakti Prakash Shrivastva on December 3, 2021
0 658 Views

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                  पूर्वी उत्तर प्रदेश में खासकर गोरखपुर और उसके आस-पास के जिलो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खासा प्रभाव है। विशेषकर गोरखपुर मण्डल की 28 विधानसभा क्षेत्रों में इनके सीधे प्रभाव का प्रमाण पिछले दो दशकों के चुनावी नतीजों से मिलता हैं। 2017 की विधानसभा में इन 28 सीटों मे से 23 पर बीजेपी, एक पर उसकी सहयोगी सुभासपा (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी), एक पर निर्दल, एक पर एसपी, एक पर कांग्रेस  और एक पर बीएसपी का कब्जा रहा। इस बार जबकि 2022 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है। चार मुख्य और कई छोटे-छोटे राजनीतिक दलों की मौजूदगी के बावजूद सत्ता के लिए संघर्ष सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी में होना माना जा रहा है। क्योंकि पिछले एक दशक में किसी न किसी कारणवश दलितों को अपने साथ लामबंद रख कई बार सत्ता का सुख भोग चुकी बीएसपी जैसी कद्दावर पार्टी इस बार कुछ अलग-थलग पड गयी है। आलम ये है कई बीएसपी विधायकों ने चुनाव से पहले ही पार्टी छोड़ एसपी-बीजेपी जैसी पार्टियों का दमन थाम चुके है। कांग्रेस अभी भी प्रियंका गांधी के अथक प्रयास के बावजूद अपने को मुख्य लड़ाई में कर पाने में कामयाब नहीं हो सकी है। ले दे कर एक समाजवादी पार्टी ही है जो गाहे बेगाहे सरकार को घेरने की कोशिश करती है। यह अलग बात है की प्रदेश में सरकार से लोगो की नाराजगी, बीजेपी कार्यकर्ताओं में बढ़ रहे आक्रोश और सरकार की नाकामियो को जनता तक एक मजबूत विपक्ष के रूप में पहुंचा पाने में वो भी कामयाब नहीं हो पा रही है। ऐसे में कहीं न कहीं कमजोर विपक्ष की वजह से सत्तारूढ़ बीजेपी का चुनावी वैतरणी पार करना आसान सा होता लग रहा है।

जबकि सत्तारूढ़ सरकारों से जनता की स्वाभाविक नाराजगी के अलावा इस बार कमर तोड़ मंहगाई, बेरोजगारी, कोरोना में शुरुआती विफलता जैसे अनेकानेक मुद्दे है जिस पर जनता मजबूत विपक्ष के साथ मजबूती से खड़ा होने को बेताब है। मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद सरीखे कई छोटे-बड़े माफियाओं पर प्रभावी नकेल कसे जाने और कई दर्जन इंकाउंटरों के बावजूद प्रदेश में अपराध की वारदातों में कमी न होने जैसे मुद्दों को भी जनता के जेहन में चुनाव तक बनाए रखने में भी विपक्षी दल सफल होते नजर नहीं आ रहे है। क्योंकि इन सारी कमियों के बावजूद भ्रष्टाचार पर जीरो तालरेंस, नब्बे के दशक से बंद पड़े खाद कारखाने को चलवाने, गोरखपुर में एम्स, निजी विश्वविद्यालय, आयुष विश्वविद्यालय, सैनिक स्कूल, सदको का संजाल, मुंबई के मरीन ड्राइव के तर्ज पर रामगढ़ ताल क्षेत्र का विकास, वाटर स्पोर्ट्स, पिपराइच चीनी मिल, कई मेडिकल कालेजों की स्थापना, कुशीनगर में इन्टरनेशनल एयरपोर्ट सरीखे कई एसे योजनाए-परियोजनाए जनता के दिलो-दिमाग पर नाराजगी कम करने के लिए और पुनः भरोसा करने के लिए बाध्य करने के लिए काफी है। इसके अलावा बीजेपी में मोदी, शाह वर्सेज़ योगी विरोध सोशल मीडिया में लगातार छाये रहने के बावजूद सारी कयासो पर विराम लगाते हुए हाइकमान यानि मोदी-शाह ने योगी की अगुवाई में ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की जिस तरह हरी झंडी दी उसने योगी की लोकप्रिय मजबूती पर मुहर लगाने का काम किया। वो योगी जो कभी पार्टी की कमजोर स्थिति के समय में भी अपनी बदौलत विधानसभा और संसद में इलाके का प्रतिनिधित्व कराते रहे। इस बार कमजोर विपक्ष और सरकार के अपने कामकाज से संतुष्ट कान्फिडेंट योगी कुछ पहले से बेहतर करने के मंसूबे के साथ चुनाव मैदान में जाएँगे। वरिष्ठ पत्रकार और इलाके की राजनीति को बखूबी समझने वाले राजेश श्रीनेत का मानना है कि प्रदेश मे कमजोर विपक्ष की वजह से योगी अपने विकासी तेवर और भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस वाली जन छवि के चलते फिलहाल चुनावी दौड़ में आगे दिख रहे हैं। स्थितियों की जमीनी आकलन करने पर श्री श्रीनेत का विश्लेषण पुख्ता नजर आता है। क्योंकि प्रदेश में आज चुनाव होने में महज चंद माह बाकी है लेकिन जिस तरह विपक्ष सिर्फ विपक्ष होने की औपचारिकता निभा रहा है उससे लगता है कि यदि विपक्ष की यही चाल आगे भी रही तो पूर्वाञ्चल खासकर गोरखपुर और आसपास के 28 विधानसभा सीटों पर परिणामों बहुत कुछ पहले से अलग नहीं होगा। यानि योगी के गढ़ में विपक्ष की दाल गलती नहीं दिखेगी। 2017 के विधानसभा चुनाव परिणाम की मुताबिक योगी का गढ़ माने जानेवाली 28 सीटों में गोरखपुर के चिल्लूपार से बीएसपी के विनय शंकर तिवारी, देवरिया के भाटपार रानी से सपा के आशुतोष उपाध्याय, कुशीनगर के तमकुही राज से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और महराजगंज के नौतनवा से निर्दल अमन मणि त्रिपाठी को छोड़कर अन्य सभी सीटों पर बीजेपी का कब्जा था। चुनाव परिणाम के इस तस्वीर को बदलने के लिए विपक्षी दलों को ख़ासी मशक्कत करनी होगी।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *