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October 8, 2026
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बिहार में फिर छले गए मुस्लिम

By Shakti Prakash Shrivastva on October 27, 2025
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                                                                                शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
बिहार में हो रहे विधानसभा चुनाव में इस बार मुस्लिम बुरी तरह छले गए हैं। बिहार विधानसभा के चुनाव में दो ही सियासी गठबंधन है जो एक दूसरे से सियासी लुकाछिपी कर रहे है। एक है बीजेपी नीत गठबंधन एनडीए और दूसरा है राजद-कांग्रेस वाला आईएनडीआईए। इसमें एनडीए के साथ मुस्लिमों का झुकाव न के बराबर है तो ऐसे में शेष मुस्लिमों के लिए बचा सिर्फ आईएनडीआईए गठबंधन। लेकिन अफसोस कि यह जानते हुए कि मुस्लिम वोट मेरे समर्थन में है आईएनडीआईए गठबंधन के किसी भी दल ने उन्हे उनकी अपेक्षा के अनुरूप सीटें नहीं दी है और न ही उनके लिए कोई भविष्य के लिए वादा ही किया है। अलबत्ता उनसे कम महत्व वाले दल को चुनाव जीतने की स्थिति में डिप्टी सीएम का पद देने की घोषणा कर दी है। हालांकि एक कांग्रेसी नेता ने डिप्टी सीएम का पद देने की वकालत की है।
इस तरह ऐसा लगता है कि बिहार में एक बार फिर सियासी दल मुस्लिम प्रतिनिधित्व को नजरअंदाज करने की सियासी चाल चल रहे हैं। बीजेपी ने जहां इस चुनाव में एक भी सीट मुस्लिम को नहीं दिया है वही उसके सहयोगियों ने मिलकर पाँच सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। मुस्लिमों को इस बार आईएनडीआईए गठबंधन से काफी उम्मीदें थी कि वो उनको न केवल बेहतर संख्या में सीटें देंगे बल्कि सरकार में उचित प्रतिनिधित्व का भरोसा भी देंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। गठबंधन की सहयोगी वीआईपी पार्टी के मुखिया मुकेश साहनी के लिए डिप्टी सीएम पद देने की घोषणा हो गई और मुस्लिमों को बीजेपी का भय दिखाकर महज पाकेट का वोटबैंक समझा गया। क्योंकि उसे मालूम है कि मुस्लिम वोट अन्य कही जाएगा नहीं। इसलिए वो समर्थन की मजबूरी देख बेफिक्र है।
बिहार में लगभग अठारह प्रतिशत आबादी वाला मुस्लिम वोटर लगभग पचास-साठ सीटें पर निर्णायक है। लेकिन विधानसभा में उनकी हिस्सेदारी आठ फीसद से भी कम है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब सियासी दलों द्वारा बिहार में मात्र साठ की संख्या में मुस्लिम उम्मीदवार बनाए गए हैं। ऐसा पिछले ढाई दशकों से लगातार देखा जा रहा है। इस नए बदलाव के तहत देखने में आ रहा है कि मुस्लिम बाहुल्य इलाके में भी गैर मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिए गए है।
पिछले दिनों राजद, कांग्रेस और वाम दलों ने मिलकर राजद नेता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है। उसके एक दिन पहले ही विकासशील इंसान पार्टी सुप्रीमो मुकेश साहनी को डिप्टी सीएम बनाने का ऐलान किया गया है। सियासी जानकारों का मानना है कि आईएनडीआईए गठबंधन के दलों को मुस्लिम ध्रुवीकरण का डर सता रहा है। क्योंकि इनके नेताओं को लगता है कि अठारह फीसद को भागीदारी देने के चक्कर में बयासी फीसद न बिखर जाए। जानकारों की माने तो पिछले 2020 के चुनाव में मुस्लिमों के साथ होते हुए भी अत्यंत पिछड़ा वर्ग के वोटों के बंटवारे की वजह से आईएनडीआईए गठबंधन को खासा नुकसान हुआ था। इसीलिए इस बार मुकेश साहनी को आगे करके गठबंधन पुराने नुकसान की भरपाई करना चाहता है। इस तरह से बिहार में एक बार फिर मुस्लिम छले गए हैं।

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