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November 4, 2026
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बढ़ेगा बृजभूषण का ‘दबदबा’ !

By Shakti Prakash Shrivastva on November 4, 2026
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                                                    शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की भूमिका और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्योंकि बीते दिनों लखनऊ में हुई पार्टी की अहम बैठक से बृजभूषण की दूरी से उपजे संयोग को भी इस मुलाकात की वजह माना जा रहा है। वैसे भी लंबे समय से पार्टी के भीतर अपनी अलग पहचान रखने वाले बृजभूषण सिंह की इस मुलाकात को महज शिष्टाचार भेंट मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इसे बीजेपी के भीतर उनके महत्व और भविष्य की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस मुलाकात के बाद उन्हें कोई नई जिम्मेदारी दिए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने सियासी अटकलों को जरूर हवा दे दी है।

बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति का ऐसा नाम हैं, जिनका प्रभाव गोंडा, कैसरगंज और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित नहीं माना जाता। छह बार सांसद रह चुके बृजभूषण की राजनीतिक यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। बीजेपी से उनका पुराना रिश्ता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उनके बयानों और पार्टी नेतृत्व से अलग-अलग मुद्दों पर उनके रुख ने उन्हें लगातार चर्चा में बनाए रखा। महिला पहलवानों के आरोपों के बाद पैदा हुए विवाद ने भी उनकी राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक छवि को प्रभावित किया। ऐसे माहौल में राष्ट्रीय अध्यक्ष से उनकी मुलाकात के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं।

26 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से घोषित प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल किया जाना इस दिशा में पहला महत्वपूर्ण संगठनात्मक संकेत है। छह बार सांसद रहने के बावजूद इससे पहले उन्हें प्रदेश या राष्ट्रीय संगठन में कोई औपचारिक पद नहीं मिला था। लिहाजा इस फैसले को उनकी संगठन में वापसी के रूप में देखा जा रहा है।

अब राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात की चर्चा ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है। सवाल यह है कि क्या बीजेपी नेतृत्व 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बृजभूषण सिंह की क्षेत्रीय और सामाजिक पकड़ का इस्तेमाल करना चाहता है? उनके बेटे करण भूषण सिंह कैसरगंज से सांसद और प्रतीक भूषण सिंह गोंडा से विधायक हैं। इस तरह परिवार की राजनीतिक मौजूदगी भी बनी हुई है।

बीजेपी के लिए बृजभूषण की उपयोगिता का सवाल भी महत्वपूर्ण है। 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को पूर्वांचल और अवध के क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत रखनी है। ऐसे में बृजभूषण जैसे पुराने और प्रभावशाली चेहरे को संगठन में शामिल करना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी उन्हें केवल प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य तक सीमित रखती है या चुनावी गतिविधियों में कोई बड़ी भूमिका भी देती है।

बृजभूषण सिंह के लिए भी यह समय अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करने का है। लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि उनका दबदबा कितना बढ़ेगा, बल्कि यह है कि बीजेपी नेतृत्व उन्हें आने वाले चुनाव में कितनी बड़ी भूमिका सौंपता है। क्या बृजभूषण एक बार फिर पूर्वांचल की राजनीति में पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल होंगे या उनकी भूमिका संगठनात्मक दायरे तक सीमित रहेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में पार्टी के फैसलों से मिलेगा।

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