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October 9, 2026
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यूपी में NDA सहयोगी ही दे रहे हैं ‘टेंशन’

By Shakti Prakash Shrivastva on August 10, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                  अगले साल लोकसभा का चुनाव होना है। चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सरगर्मियाँ बढ़ गई हैं। चुनाव के मद्देनजर देश में सबसे अहम सूबा होने के नाते उत्तर प्रदेश में सियासी गतिविधियां अन्य राज्यों की अपेक्षा कुछ अधिक ही है। यहाँ सर्वाधिक मुश्किल स्थिति सत्ताधारी बीजेपी के गठबंधन NDA की होती दिख रही है। क्योंकि यहाँ गठबंधन में पहले अपना दल एस और निषाद पार्टी ही मुख्य थे लेकिन पिछले दिनों बदले सियासी घटनाक्रम में गठबंधन से अलग हो चुकी पार्टी सुभासपा फिर से गठबंधन में वापस आ गई है। ऐसे में ये सहयोगी दल अपने-अपने हिसाब से अगुवाई कर रहे दल बीजेपी से अपने लिए सीटों की मांग करने लगे हैं। सीटो को लेकर सबसे पहले दबाव बनाने की शुरुआत निषाद पार्टी ने की लेकिन उसके बाद अपना दल और सुभासपा ने भी मौका देख अपनी मांग रखनी शुरू कर दी।

निषाद पार्टी से मिल रही जानकारी की मुताबिक पार्टी लोकसभा की सैंतीस सीटों पर दावा कर रही है। पार्टी का मानना है कि जिन सीटों पर पिछली बार बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था वो सीटे हमें दे दे हम जिता कर दिखा देंगे। पार्टी यह भी मांग कर रही है कि वो अपने सिंबल पर चुनाव लड़ेगी। पिछली बार यानि 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के इकलौते उम्मीदवार पार्टी प्रमुख संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद संत कबीरनगर से बीजेपी के सिंबल पर सांसद चुने गए थे। बाद में संजय निषाद स्वयं विधान परिषद सदस्य बन सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सिंबल पर ही उनके दूसरे बेटे सरवन निषाद गोरखपुर की चौरीचौरा विधानसभा से चुनाव लड़कर विधायक बने। निषाद पार्टी ने सैंतीस सीटों की मांग के कुछ ही दिनों बाद ही अपना दल प्रमुख और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान अनुप्रिया पटेल के पति और योगी सरकार में मंत्री आशीष पटेल भी मौजूद थे। सूत्रों की मानें तो इस मुलाकात के दौरान अपना दल की ओर से यूपी में दो से ज्यादा लोकसभा सीटों की मांग रखी गई। बीते चुनाव में अपना दल मिर्जापुर और सोनभद्र सीट पर चुनाव लड़ी थी। जबकि 2014 में पार्टी मिर्जापुर और प्रतापगढ़ में चुनाव लड़ी थी। इस बार मिर्जापुर और सोनभद्र के अलावा पार्टी प्रतापगढ़ सीट भी मांग रही है। इसके अलावा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी जो हाल ही में दुबारा बीजेपी गठबंधन की सहयोगी बनी है। उसने भी लोकसभा के लिए तीन सीटों की मांग कर दी है।

इस तरह पहले निषाद पार्टी फिर अपना दल और अब सुभासपा की तरफ से की जा रही सीटों की मांग ने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सियासी जानकारों की माने तो जल्द ही गठबंधन में कुछ और छोटे दल सहयोगी बन सकते हैं। यह भी एक कारण है जिसकी वजह से बीजेपी हाईकमान सीटों का बंटवारा करने की स्थिति में नही है। बीजेपी चाहती है कि जब गठबंधन में शामिल दलों की स्थिति स्पष्ट हो जाये तब ही सीटों को लेकर अंतिम निर्णय किया जाये।

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