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जातीय पतवार से INDIA की नईया होगी पार!

By Shakti Prakash Shrivastva on November 7, 2025
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                                                                    शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

जातीय सियासत के लिए मशहूर बिहार के मौजूदा विधानसभा चुनाव में भी जातीयता का ही बोलबाला है। कोई दल इससे अछूता नहीं है। लेकिन इनमें भी आईएनडीआईए गठबंधन इसके लिए खासा बदनाम है। क्या राजद और क्या कांग्रेस सभी ने अपने-अपने जाति विशेष के इर्द-गिर्द ही अपनी सियासत का ताना-बाना बुना है। लालू प्रसाद यादव की समूची सियासत ही इसके इर्द-गिर्द की रही है। इसलिए उनकी पार्टी राजद के लिए ऐसा करना लाजिमी है। इस बार के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर आईएनडीआईए गठबंधन के प्रमुख घटक दल अपने-अपने जाति व पसंदीदा जातियों के इर्द-गिर्द ही समीकरण साधने में लगे है। उन्हे यह भरोसा हो चला है कि जनता के पास उनका सबसे बड़ा ट्रम्प जाति ही है। राजद ने जहां उम्मीदवारों के चयन में पिछड़े वर्ग को प्राथमिकता दी है वहीं कांग्रेस ने सवर्णों में भरोसा जताया है।

आईएनडीआईए गठबंधन में आपसी सहमति से हुए बंटवारे में राजद 142, कांग्रेस 61, भाकपा (माले) एल 20, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) 10, भाकपा 9, माकपा 4 और पहली बार चुनाव लड़ रही भारतीय समावेशी पार्टी (आईआईपी) 2 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। वीआईपी के दो और राजद के एक उम्मीदवार यानि कुल तीन उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज हो गए हैं। लिहाजा चुनाव मैदान में गठबंधन के 251 उम्मीदवार ही मैदान में रह गए हैं। इनमें भी 3 सीटें ऐसी हैं जिन पर गठबंधन का कोई उम्मीदवार नहीं है जबकि 11 सीटों पर सहयोगियों के बीच दोस्ताना मुकाबला हो रहा है।

इनमें उम्मीदवारों की जातियों के आँकड़े बताते हैं कि कांग्रेस ने सर्वाधिक टिकट उच्च जाति के उम्मीदवारों को ही दिए गए हैं। कुल 61 उम्मीदवारों में से 24 या लगभग 40% उच्च जातियों से हैं – जिनमें 8-8 ब्राह्मण और भूमिहार उम्मीदवार, 5 राजपूत, 2 बनिया और 1 कायस्थ शामिल हैं। पार्टी ने अति पिछड़ा वर्ग को 4 टिकट दिए हैं, जो कुल सीटों का 7.4% है, और ओबीसी (9.2%) को 5 टिकट दिए हैं। 4 ईबीसी उम्मीदवारों में से, इसके सभी 5 ओबीसी उम्मीदवार यादव (9.3%) हैं।

जातियों के मामले में राजद का मामला कांग्रेस से उलट है। उसने सवर्णों की अपेक्षा पिछड़ी जातियों पर भरोसा जताया है। 142 उम्मीदवारों में 75 या 52% ओबीसी हैं। इन 75 में से 51 यादव (कुल सूची का 20.3%) हैं, जबकि 13 टिकट कुशवाहा और बाकी 11 कुर्मी, कोइरी और मल्लाह सहित अन्य ओबीसी समूहों से हैं। पार्टी की उम्मीदवारों की सूची में 16 उच्च जातियाँ (कुल सूची का 11.2%) और 11 अति पिछड़ी जातियाँ (7.7%) हैं। महागठबंधन के उम्मीदवारों की सूची के विश्लेषण से पता चलता है कि वंचित जातियों के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अपने अभियान के बावजूद, कांग्रेस द्वारा मैदान में उतारे गए लगभग 40% उम्मीदवार ऊंची जातियों से हैं। जबकि राजद के कुल उम्मीदवारों में 52% ओबीसी हैं।

अब देखना दिलचस्प ये है कि जातियों पर इतना भरोसा किए जाने के बाद चुनाव परिणाम कितना मुफीद साबित होता है।

 

 

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