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बुरे दौर में नेपाल !

By Shakti Prakash Shrivastva on September 12, 2025
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                                                                         शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

राजशाही से कथित लोकशाही पर उतरी नेपाली व्यवस्था बहुत दिनों तक स्थिरचित्त नहीं रह पाती है। पिछले दो दशकों का रिकार्ड इस बात का साक्षी है। कारण जो भी हो अभी हालिया घटनाक्रम पर गौर करें तो लगेगा कि आखिर ऐसा क्या हो गया या ऐसा क्या हुआ जो मात्र दो दिनों का घटनाक्रम नियंत्रित नहीं हो सका और नेपाल के प्रधानमंत्री को पद से इस्तीफा देने तक को बाध्य होना पड़ा। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने हिंसक प्रदर्शन के बाद इस्तीफा भी दे दिया। ऐसा हुआ भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में पनप रहे आक्रोश को प्रशासन द्वारा समय पर नहीं समझने की वजह से। जनता के आक्रोश में आग में घी का काम किया सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के सरकारी आदेश ने। क्योंकि इससे प्रभावित युवा जेन-जी की अगुवाई में सड़क पर मरने-मारने पर उतारू हो गए। सरकारी इमारतों समेत संपत्तियों को भीड़ ने आग के हवाले कर दिया। भीड़ को काबू में करने के लिए सेना को गोलियां चलानी पड़ी। गोलीबारी में डेढ़ दर्जन से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हुए। पूरे देश में कर्फ्यू लगाया गया है। नई सरकार के गठन को लेकर कवायद शुरू हो गई है।

हुआ ये कि सितंबर महीने के पहले हफ्ते में नेपाल सरकार की तरफ से देश में चल रहे सोशल मीडिया के व्हाट्सअप, यूट्यूब, फेसबुक जैसे प्लेटफार्म की सेवाएँ यह कहते हुए रोक दी गयी कि इन सेवा प्रदाता कंपनियों ने सरकार द्वारा निर्धारित औपचारिकताए पूरी नहीं की है। प्रतिबंध लगने की औपचारिक सूचना मिलते ही युवाओं में आक्रोश बढ्ने लगा। जो भ्रष्टाचार को लेकर पहले से ही आक्रोशित था। देखते-देखते जेन-जी समूह की अगुवाई में युवाओं ने सरकार के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिया। पूरे देश के हर हिस्से में यह विरोध तेजी से फैलने लगा। प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम करने से लेकर वाहनो में तोडफोड आदि भी करना शुरू कर दिया। पुलिस और सेना के जवानों ने स्थिति को बहुत संभालने का प्रयास किया लेकिन समय के साथ स्थिति बेकाबू होते चली गयी। आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच सीधा टकराव होने लगा। ऐसे में हुए हिंसक झड़पों में सेना द्वारा की गई गोलीबारी से लगभग डेढ़ दर्जन आंदोलनकारियों की मौत हो गई और सैकड़ों की संख्या में घायल हो गए। आनन-फानन में सोशल मीडिया मंचों पर लगा प्रतिबंध हटाया गया लेकिन स्थिति काबू में नहीं होते देख प्रधानमंत्री के पी ओली ने इस्तीफा दे दिया। फिर भी स्थिति नहीं बदली, प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास,सरकारी इमारतों, राजनीतिक दलों के कार्यालयों समेत वरिष्ठ नेताओं के घरों में आगजनी की। पूर्व पीएम एवं सीपीएन (एकीकृत) नेता झालानाथ खनल की पत्नी रवि लक्ष्मी काठमांडू के दल्लू इलाके स्थित घर मे हुई आगजनी मे जल गई हैं। हजारों की तादाद मे नेपाली जेलों से कैदी फरार हो गए है। नेपाली सरकार के गृहमंत्री रमेश लेखक, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल समेत कई कैबिनेट मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब नई सरकार के गठन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने पर सहमति बन रही है। फिलहाल 6 सितंबर से शुरू हुआ अस्थिरता का दौर देश में कर्फ्यू लगने के बाद थमता नजर आ रहा है। वैसे 2008 में राजशाही के अंत के बाद आज 17 सालों में 14 बार नेपाल को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ा है।

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