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October 8, 2026
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बिहार में मोदी का ‘फुले’ अटैक

By Shakti Prakash Shrivastva on August 21, 2025
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                                                               शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

देश में सियासी दलों के जितने भी दिग्गज नेता हैं उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इकलौते ऐसे नेता हैं जिनकी सियासत औरों से भिन्न है। उनकी सियासी चाल को समझना आम सियासतदाँ की समझ से परे है। मोदी की देखरेख में राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र जैसे जितने भी राज्यों में मुख्यमंत्री का चयन किया गया हो या फिर राष्ट्रपति- उपराष्ट्रपति पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार के चयन हों, सभी में चौंकाने वाले नाम ही फाइनल हुए। जिन नामों का चयन हुआ वो न तो कही पहले चर्चा में थे और न ही कही उनका योग्यता का कोई ठोस आधार ही था। ऐसे ही अभी जगदीप धनखड़ के इस्तीफे से खाली हुई उपराष्ट्रपति की सीट पर सीपी चंद्रशेखर को उम्मीदवार बना कर उन्होंने सभी दलों के नेताओं को चौंका दिया।  हाल में उन्होंने अपने एक निर्णय से बिहार चुनाव से पहले विपक्ष को भी चौंका दिया है। इस क्रम में उन्होंने समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती मनाने की घोषणा कर दी है। उनके इस निर्णय ने बिहार में राजद और कांग्रेस की पिछड़ा, अति पिछड़ा और दलित वोट बैंक साधने वाली रणनीति की हवा निकाल दी है। इस निर्णय के बलबूते अब बीजेपी समता मूलक समाज को साधना चाहती है।

ऐसे समय में जब बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजद और कांग्रेस जैसे दल, मुस्लिमों और यादवों के अलावा अन्य जातियों के वोट को अपने पक्ष में करने के लिए वोट अधिकार यात्रा निकाल रही है। कांग्रेस पार्टी ने तो बाकायदे प्रदेश के उन्नीस फीसद दलित मतदाताओं को साधने के लिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी जैसे अहम पदों पर दलित नेताओं को आसीन कर दिया है। दलित नेता कृष्णा अल्लाबरून को जहां बिहार का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है वहीं राजेश राम को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी गई है। पूर्व मंत्री छेदी राम, संजीव टोनी, प्रतिमा दास, विश्वनाथ राम, नागेंद्र पासवान जैसे कांग्रेसी नेताओं को आगे कर पार्टी ने एनडीए के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। इतना ही नहीं राष्ट्रीय जनता दल से मिलकर निकाली जा रही वोट अधिकार यात्रा की शुरुआत भी दलितों के मसीहा रहे बाबू जगजीवन राम की जन्मस्थली सासाराम से शुरू की गई है। अपने इस रणनीति के तहत एनडीए को गंभीर चुनौती देने में जुटी कांग्रेस को पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित वोट को साधने में राजद और सीपीआई, सीपीएम और माले भी साथ दे रही है।

समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी। इस समाज का उद्देश्य महिलाओं, दलितों और अन्य हाशिए के समूहों के लिए समान अधिकार और अवसर सुनिश्चित करना था। महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर भारत में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने का भी काम किया। उन्होंने 1848 के दौरान पूना में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला।

ऐसे दलितों के मसीहा ज्योतिबा फुले के जरिए बीजेपी ने विपक्षी दलों की पिछड़ा, अति पिछड़ा और दलित समाज को साधने वाले समीकरण को खासा प्रभावित किया है। इस प्रयोग के चलते पार्टी अपनी राजनीति को सकारात्मक राजनीति में परिवर्तित कर एक बड़े वर्ग को प्रभावित करना चाहती है। पार्टी को यकीन है कि इसका बिहार चुनाव परिणाम पर खासा असर दिखेगा।

 

 

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