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August 10, 2026
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सड़क से आए केजरीवाल की संसद के लिए तडप !

By Shakti Prakash Shrivastva on March 1, 2025
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                                                                              शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

सत्ता सुख में कुछ है ही ऐसा जिसके चलते एक बार सत्ता का सुख भोग लेने वाला व्यक्ति उसके बिना रह नहीं पाता है। वो बेचैन हो जाता है। ऐसी ही कुछ बेचैनी इन दिनों दिल्ली चुनाव हारने के बाद वहाँ के मुख्यमंत्री रहे और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल में दिख रहा है। एक दशक से अधिक तक सत्ता के शीर्ष पर रहने के बाद जब पिछले दिनों दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के साथ-साथ उनकी भी करारी हार हुई तो केजरीवाल चिंतित हो गए। उन्हे ऐसी हार का दूर-दूर तक अंदेशा नहीं था। लेकिन कहते है न कि राजनीति संभावनाओं का खेल है। यहाँ पल में असंभव संभव और संभव असंभव में तब्दील हो जाता है। मौजूदा सियासी समीकरणों को देखते हुए लगभग दो साल पहले तक किसी रास्ते से केजरीवाल का किसी सदन में पहुंचना संभव नहीं लग रहा। जबकि केजरीवाल किसी न किसी सदन में हर हाल में पहुंचना चाहते है। पंजाब के लुधियाना पश्चिम विधानसभा उपचुनाव के लिए आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा का नाम घोषित किए जाने से ऐसी चर्चाओं को पुख्ता आधार भी मिल गया है। क्योंकि इससे यह स्पष्ट होने लगा है कि आम आदमी पार्टी अब अरविंद केजरीवाल को राज्यसभा के माध्यम से संसद में भेजने की तैयारी मे है।

पार्टी के राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाने से ऐसा लग रहा है कि अब अरोरा से इस्तीफा लेकर पार्टी उनके रिक्त स्थान पर अरविन्द केजरीवाल को राज्यसभा भेजेगी। हालांकि अब इस मुद्दे पर पंजाब में सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने आप नेता और लुधियाना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक गुरप्रीत गोगी के निधन से रिक्त हुई सीट पर गोगी की पत्नी डॉ सुखचैन बस्सी गोगी की दावेदारी खारिज कर अच्छी खासी रकम लेकर यहाँ संजीव अरोड़ा को उम्मीदवार बनाने का आरोप लगाया है। काँग्रेस का यह भी आरोप है कि अपने हित के लिए केजरीवाल ने अरोड़ा से रिश्वत लेकर उन्हे पंजाब सरकार की कैबिनेट में जगह दिलाने का भरोसा भी दिया है। अमूमन राजनीति में ऐसा देखा गया है कि किसी प्रतिनिधि के निधन पर उसके परिवार के ही किसी सदस्य को पार्टियां अपना उम्मीदवार बनाती है। क्योंकि उन्हे ऐसा करने से चुनाव में मतदाताओं का भावनात्मक समर्थन मिलने की उम्मीद रहती है। व्यवहारतन ऐसा लगभग हर पार्टियां करती भी रहती है। काँग्रेस का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री और आपनेता भगवंत मान हमेशा पंजाबी भाषा के पक्ष में आवाज उठाते रहते हैं। अक्सर विपक्षी नेताओं की अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए फटकार भी लगाते रहते है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि केजरीवाल सरीखा पंजाबी नहीं जानने वाले सांसद का बचाव कैसे करेंगे भगवंत मान।

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी आम आदमी पार्टी पर पंजाब को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने आप के राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को लुधियाना पश्चिम से अपना उम्मीदवार बना उनकी खाली हुई राज्यसभा सीट से अरविंद केजरीवाल को पंजाब से राज्यसभा सांसद भेजे जाने को दिल्ली के लिए पंजाब को कुर्बान किया जाना माना है। हालांकि विपक्षी कुछ भी कहें लेकिन आप के मुखिया अरविन्द केजरीवाल इस तरह से अपना सपना पूरा करने में जरूर कामयाब हो जाएंगे।

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